जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव 2026 में वोटिंग की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही असली सियासी शह-मात का खेल शुरू होने जा रहा है। चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे प्रत्याशियों का भविष्य ईवीएम में कैद होते ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस ने अपने-अपने खेमों को सुरक्षित करने के लिए बिसात बिछा ली है। दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों का पूरा ध्यान अब संभावित जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग को रोककर अपना बोर्ड बनाने पर टिक गया है।
बीजेपी का ‘प्रशिक्षण वर्ग’ और ‘ऑपरेशन बोर्ड’
निकाय चुनाव का मतदान संपन्न होते ही बीजेपी अपने ‘ऑपरेशन बोर्ड’ को अमलीजामा पहनाने में जुट जाएगी। पार्टी की पैनी नजर विशेष रूप से उन निकायों पर है जहां मुकाबला बेहद कड़ा है और पार्टी बहुमत के आंकड़े के आसपास सिमट सकती है।
क्रॉस वोटिंग के खतरे से बचने के लिए बीजेपी ने एक नया तरीका निकाला है। पार्टी ऐसे निकायों के प्रत्याशियों को होटल या रिसॉर्ट में ले जाकर ठहराएगी, जिसे आधिकारिक रूप से ‘प्रशिक्षण वर्ग’ का नाम दिया गया है। जिन निकायों में स्पष्ट बहुमत मिलेगा, वहां का फैसला स्थानीय समीकरणों को देखकर होगा। संगठन ने इस पूरे ऑपरेशन की जिम्मेदारी संबंधित जिलाध्यक्षों और निकाय प्रभारियों को सौंपी है।
कांग्रेस की बाड़ेबंदी, राजस्थान से बाहर ले जाने की तैयारी
दूसरी ओर, 169 नगरीय निकायों में पहले चरण की वोटिंग के बाद कांग्रेस ने भी अपने कुनबे को एकजुट रखने के लिए फुलप्रूफ प्लानिंग की है। प्रदेश नेतृत्व ने सभी विधायकों, जिला व विधानसभा प्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं को अलर्ट मोड पर रख दिया है।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, जिन निकायों में कांटे की टक्कर है, वहां वोटिंग खत्म होते ही प्रत्याशियों को गुप्त ठिकानों, होटल या रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया जाएगा। कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में पार्षदों को राजस्थान से बाहर दूसरे राज्यों में भी भेजा जा सकता है। इसके लिए कांग्रेस ने पहले से ही होटल और रिसॉर्ट्स में बुकिंग तय कर ली है।
मजबूत निर्दलीयों पर दोनों दलों की डोरे
मेयर, नगर परिषद अध्यक्ष और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव 20 सितंबर 2026 को होना है, जबकि डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष का चुनाव 21 सितंबर को तय है। ऐसी स्थिति में दोनों ही दलों को यह बखूबी अहसास है कि बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए निर्दलीय और बागी प्रत्याशी सबसे बड़े ‘किंगमेकर’ साबित होंगे। यही वजह है कि बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ने ही अपनी विचारधारा से जुड़े और मजबूत निर्दलीय उम्मीदवारों पर अभी से डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। 21 सितंबर तक चलने वाले इस सियासी ड्रामे में कौन किस पर भारी पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।



