जयपुर। Rajasthan Municipal Election 2026: राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों को बगावत का सामना करना पड़ा है। टिकट नहीं मिलने से नाराज बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। अनुमान के मुताबिक, भाजपा से करीब 9 हजार और कांग्रेस से 8 हजार से अधिक बागी उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे। हालांकि, नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब दोनों दलों में कितने बागी प्रत्याशी मैदान में रह गए हैं, इसका आधिकारिक आंकड़ा सामने आना बाकी है।
टिकट वितरण के बाद दोनों दलों में बढ़ी नाराजगी
नगर निकाय चुनाव के लिए प्रत्याशियों की घोषणा के बाद कई वार्डों में टिकट को लेकर भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली। टिकट के दावेदारों ने पार्टी के फैसले का विरोध करते हुए कई जगह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया। इस बगावत का असर कई निकायों के चुनावी समीकरण पर दिखाई दे रहा है। कुछ वार्डों में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के सामने उन्हीं के पुराने कार्यकर्ता चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए चुनौती बढ़ गई है।
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कांग्रेस ने बागियों को लेकर साफ किया रुख
नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कांग्रेस ने पार्टी लाइन के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि चुनाव लड़ना हर व्यक्ति का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अगर पार्टी का जिम्मेदार पदाधिकारी या कार्यकर्ता पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर अधिकृत प्रत्याशी के सामने चुनाव लड़ता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डोटासरा के मुताबिक, बागियों को मनाने के लिए पार्टी स्तर पर हरसंभव प्रयास किए गए हैं। अब जो लोग पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव मैदान में बने हुए हैं, उनके मामलों पर अनुशासन समिति फैसला करेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि निकाय चुनाव में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है और पार्टी ने बड़ी संख्या में टिकट दिए हैं। डोटासरा ने चुनाव के बाद ज्यादा से ज्यादा बोर्ड कांग्रेस के बनने का दावा भी किया।
भाजपा ने भी बागियों को दिया कार्रवाई का संकेत
कांग्रेस की तरह भाजपा ने भी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे बागियों पर कार्रवाई का रुख अपनाया है। भाजपा महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी ने कहा कि पार्टी की ओर से अधिकतर बागियों को समझाने में सफलता मिली है। जो लोग अब भी भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा की ओर से नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं से फोन पर संपर्क करने के साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी बातचीत की गई। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने बागियों को मनाने की कोशिश की। भाजपा का दावा है कि बड़ी संख्या में नाराज उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस ले लिए हैं या पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में आने पर सहमति जताई है।
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कई निकायों में मुकाबला हुआ त्रिकोणीय
बागियों के मैदान में उतरने से श्रीगंगानगर, बालोतरा, जैसलमेर, बाड़मेर और कोटपूतली समेत कई निकायों में चुनावी मुकाबले का गणित बदल गया है। कई वार्डों में मुकाबला अब केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं रह गया है। बागी उम्मीदवारों के मैदान में बने रहने से कई सीटों पर त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई है। इसका सीधा असर भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों की चुनावी रणनीति पर पड़ रहा है। दोनों दलों के लिए अब केवल अपने प्रतिद्वंद्वी दल को चुनौती देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने ही संगठन से निकले बागियों के प्रभाव को कम करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
मजबूत जनाधार वाले बागियों पर पार्टियों की नजर
भाजपा और कांग्रेस नेतृत्व की नजर खास तौर पर उन बागी उम्मीदवारों पर है, जो पहले से संगठन में जिम्मेदार पदों पर रह चुके हैं या जिनका अपने वार्ड में मजबूत व्यक्तिगत जनाधार है। ऐसे उम्मीदवार पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। यही वजह है कि दोनों दलों ने बागियों को मनाने की कोशिशों के बाद अब अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
अब चुनाव परिणाम के बाद ही साफ होगा कि बागियों की मौजूदगी ने भाजपा और कांग्रेस के कितने अधिकृत प्रत्याशियों को नुकसान पहुंचाया और किन वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने पूरे चुनावी समीकरण को अपने पक्ष में मोड़ दिया।



