जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। भाजपा और कांग्रेस समेत तमाम दल अपने प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार में जुटे हैं। इसी बीच दौसा नगर परिषद के वार्ड नंबर 26 से ऐसा चुनावी घटनाक्रम सामने आया है, जहां मतदान से पहले ही कांग्रेस के खाते में एक सीट आ गई। वार्ड नंबर 26 से कांग्रेस प्रत्याशी यास्मीन बानो निर्विरोध पार्षद निर्वाचित हो गई हैं। खास बात यह रही कि उन्हें जीत के लिए मतदान का सामना ही नहीं करना पड़ा। भाजपा प्रत्याशी के नामांकन दाखिल नहीं कर पाने और मैदान में मौजूद तीन निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन वापस लेने के बाद यास्मीन बानो के सामने कोई प्रत्याशी नहीं बचा।
भाजपा प्रत्याशी का नामांकन दाखिल नहीं होना बना बड़ा कारण
वार्ड नंबर 26 में भाजपा प्रत्याशी के नामांकन दाखिल नहीं कर पाने के बाद चुनावी मुकाबले का समीकरण शुरुआत में ही बदल गया था। इसके बाद कांग्रेस प्रत्याशी यास्मीन बानो के सामने तीन निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में थे। ऐसे में माना जा रहा था कि वार्ड में कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा। लेकिन नाम वापसी की अंतिम तारीख को तीनों निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस ले लिए। इसके बाद यास्मीन बानो के खिलाफ चुनाव लड़ने वाला कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं रहा। निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।

तीनों निर्दलीय प्रत्याशियों ने वापस लिए नामांकन
वार्ड नंबर 26 में चुनावी तस्वीर नाम वापसी के आखिरी दिन पूरी तरह बदल गई। कांग्रेस प्रत्याशी के सामने मौजूद तीनों निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपने पर्चे वापस ले लिए। इसके साथ ही कांग्रेस प्रत्याशी यास्मीन बानो के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया। इस तरह जिस वार्ड में चुनाव होने की संभावना थी, वहां मतदाताओं को मतदान करने की जरूरत ही नहीं पड़ी।
विधायक दीनदयाल बैरवा की भूमिका भी चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम में दौसा से कांग्रेस विधायक दीनदयाल बैरवा की भूमिका भी चर्चा में है। जानकारी के मुताबिक, निर्दलीय उम्मीदवारों से बातचीत और समझाइश के बाद उन्होंने नामांकन वापस लेने का फैसला किया। तीनों निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान से हटने के बाद वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी अकेली रह गईं और यास्मीन बानो निर्विरोध निर्वाचित हो गईं।
यास्मीन बानो ने जताया आभार
निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद यास्मीन बानो ने कहा कि जनप्रतिनिधि बनने के बाद भी जनता के बीच एक कार्यकर्ता की तरह रहकर काम करना चाहिए। उन्होंने विधायक दीनदयाल बैरवा और उन तीनों प्रत्याशियों का आभार जताया, जिन्होंने अपने नामांकन वापस लिए। यास्मीन बानो पहले भी पार्षद रह चुकी हैं। ऐसे में वार्ड की स्थानीय राजनीति और क्षेत्र के मुद्दों से उनका पुराना जुड़ाव माना जा रहा है।
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चुनाव परिणाम से पहले कांग्रेस के खाते में आई एक सीट
राजस्थान नगर निकाय चुनाव के औपचारिक परिणाम 11 सितंबर को आने हैं, लेकिन दौसा के वार्ड नंबर 26 में कांग्रेस को उससे पहले ही जीत मिल गई। भाजपा प्रत्याशी का नामांकन दाखिल नहीं हो पाना और इसके बाद तीन निर्दलीय प्रत्याशियों का नामांकन वापस लेना इस पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम कड़ी रही। नगर परिषद के बाकी वार्डों में मुकाबला मतदान के बाद तय होगा, लेकिन वार्ड नंबर 26 का घटनाक्रम यह जरूर दिखाता है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान हुई एक चूक किस तरह पूरे चुनावी समीकरण को बदल सकती है।



