Rajasthan Panchayat Election : जयपुर। राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव में लगातार हो रही देरी पर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चुनावी तंत्र को कड़ी फटकार लगाई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य चुनाव आयुक्त, ओबीसी आयोग के सचिव और सलाहकार को व्यक्तिगत रूप से अदालत में तलब किया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि प्रशासनिक बाधाओं का हवाला देकर न्यायालय के आदेशों को टाला नहीं जा सकता। यह मामला पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान उठा, जिसमें सरकार पर अदालत के पूर्व आदेशों की जानबूझकर अनदेखी करने का आरोप लगाया गया है।

चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग की धीमी कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि राज्य चुनाव आयोग पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव कराने में खुद को असमर्थ मानता है, तो हाईकोर्ट इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए अपना अधिकारी नियुक्त करने पर विचार कर सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि प्रशासनिक देरी और लापरवाही को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा सरकार ऐसे हालात पैदा न करे, जिससे अदालत को और अधिक सख्त कदम उठाने पड़ें।

ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार का रुख
राजस्थान हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बीच राज्य सरकार ने पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव टलने के पीछे ओबीसी आरक्षण को बड़ी वजह बताया। सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने अदालत से समय सीमा बढ़ाने का आग्रह करते हुए कहा कि आदेशों की अवहेलना नहीं की जा रही, बल्कि व्यावहारिक और संवैधानिक चुनौतियों के कारण प्रक्रिया में देरी हुई है। उन्होंने बताया कि राज्य की लगभग 50 प्रतिशत आबादी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से जुड़ी है, इसलिए चुनाव से पहले आरक्षण की वैध सीमा तय करना जरूरी है। सरकार के अनुसार, ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने से सीटों के वर्गीकरण और चुनावी प्रक्रिया में विलंब हो रहा है।
14 अगस्त रिपोर्ट, 31 अगस्त अंतिम तैयारी
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए नई समय-सीमा पेश की है। सरकार के अनुसार, ओबीसी आयोग 14 अगस्त तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें सौंप देगा। इसके बाद 31 अगस्त तक आरक्षण से जुड़े सभी पहलुओं को अंतिम रूप देकर चुनाव की राह साफ करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य चुनाव आयुक्त और ओबीसी आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत या वर्चुअल रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं। अदालत के सख्त रुख के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। अब निगाहें इस पर हैं कि कोर्ट सरकार की नई समय-सीमा स्वीकार करता है या कोई सख्त आदेश जारी करता है।



