जयपुर। राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ने सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। राज्य सरकार ने 30 मामलों में 33 अधिकारियों के संबंध में दंडात्मक कार्रवाई को मंजूरी दी है। इनमें 17 सेवारत अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने और 16 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन पर रोक संबंधी कार्रवाई शामिल है। राज्य सरकार के अनुसार, ये मामले कथित आपराधिक गतिविधियों से सांठगांठ, अवैध बजरी खनन से जुड़े लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाने, जांच में लापरवाही और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग जैसे विषयों से संबंधित हैं। कार्रवाई में पुलिस, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, प्रशासनिक सेवाओं और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की 27 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार, सेवारत अधिकारियों के मामलों में आरोपों की गंभीरता के आधार पर दो से चार वार्षिक वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने की मंजूरी दी गई है।
आपराधिक गतिविधियों से सांठगांठ के मामलों में कार्रवाई
सरकार के अनुसार, आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों से सांठगांठ और अवैध बजरी खनन से जुड़े माफिया से अनुचित लाभ प्राप्त करने के मामले में एक तत्कालीन वृत्ताधिकारी की चार वार्षिक वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने की मंजूरी दी गई है। वहीं, एक मामले में समुचित अनुसंधान नहीं करने और पुलिस टीम के अधिकारियों की लापरवाही प्रमाणित होने पर तीन अधिकारियों की वेतन वृद्धि रोकने का निर्णय लिया गया। मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल अपराधियों से निकटता, कथित मिलीभगत और इनामी अपराधियों को गिरफ्तार नहीं करने से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई की गई है। इन मामलों में संबंधित तत्कालीन वृत्ताधिकारी और एक कॉन्स्टेबल की दो-दो वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने की मंजूरी दी गई।
सरकारी कामकाज में लापरवाही पर भी दंड
राज्य सरकार ने सरकारी संसाधनों के अनुचित इस्तेमाल और विभागीय जिम्मेदारियों में लापरवाही से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई की है। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कार्यों के निरीक्षण और संधारण में लापरवाही के मामले में राजस्थान प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी की वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने की मंजूरी दी गई है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय तक स्वेच्छा से अनुपस्थित रहने के तीन मामलों में संबंधित चिकित्सा अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। इसके अलावा, गलत ब्लड इश्यू करने के मामले में एक चिकित्सा अधिकारी की दो वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने का निर्णय लिया गया। श्रम, उद्यान और सचिवालय सेवा से जुड़े अधिकारियों के मामलों में भी आरोप प्रमाणित होने पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई को मंजूरी दी गई है।
सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन पर भी कार्रवाई
सरकार ने सेवानिवृत्त अधिकारियों से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में भी कार्रवाई की है। राजस्थान लेखा सेवा के एक सेवानिवृत्त अधिकारी के मामले में सरकारी अभिलेखों में कथित कांट-छांट कर निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने और राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान होने के आरोप प्रमाणित पाए गए। इस मामले में देय पेंशन का 100 प्रतिशत हिस्सा स्थायी रूप से रोकने की कार्रवाई की गई है। इसी तरह, राजस्थान प्रशासनिक सेवा के दो सेवानिवृत्त अधिकारियों के मामलों में आवासीय एवं वाणिज्यिक भूखंडों को कृषि भूमि दर्शाने और अवैध भू-रूपांतरण से राज्य सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर कार्रवाई की गई। इन मामलों में पेंशन की 20 प्रतिशत राशि पांच वर्ष तक रोकने की मंजूरी दी गई है।
फर्जी भुगतान के मामले में BDO और AEN भी दंडित
पंचायत समिति के कार्यों में बिना काम कराए फर्जी भुगतान करने और राजकोष को नुकसान पहुंचाने के मामले में एक विकास अधिकारी (BDO) और सहायक अभियंता (AEN) को भी दंडित किया गया है। इसके अलावा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, खनिज, कॉलेज शिक्षा और देवस्थान विभाग से जुड़े मामलों में भी दंडात्मक कार्रवाई को मंजूरी दी गई है। सरकार के अनुसार, इन मामलों में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और आरोपों के आधार पर नियमानुसार निर्णय लिए गए हैं।



