Sunday, October 11, 2026
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राजस्थान में किसान आंदोलन तेज, हनुमान बेनीवाल की अगुवाई में बैरिकेडिंग तोड़ हाईवे पर बैठे किसान

श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ में सिंचाई के पानी की मांग को लेकर किसान आंदोलन तेज हो गया। हनुमान बेनीवाल की मौजूदगी में किसानों ने बैरिकेडिंग हटाकर हाईवे पर धरना दिया। जानिए किसानों की मांगें, प्रशासन की तैयारी और आंदोलन से जुड़ी पूरी खबर।

श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ क्षेत्र में सिंचाई के पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। रबी की फसलों की बुवाई के बीच पानी की कमी और डीएपी खाद की उपलब्धता को लेकर किसान परेशान हैं। इसी मुद्दे पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के आंदोलन में शामिल होने के बाद प्रदर्शन ने जोर पकड़ लिया। शनिवार रात किसानों ने पुलिस की बैरिकेडिंग हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की और बाद में नेशनल हाईवे पर धरना शुरू कर दिया।

प्रदर्शन के दौरान घड़साना क्षेत्र के 12 एमडी टोल नाके के पास तनावपूर्ण स्थिति बन गई। किसानों के काफिले को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग और नाकाबंदी की थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स हटा दिए। इसके बाद किसानों ने पतरोड़ा के पास हाईवे-911 पर पड़ाव डाल दिया। इससे सड़क पर यातायात प्रभावित हुआ और वाहनों की कतारें लग गईं।

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रातभर किसानों के साथ धरने पर बैठे रहे हनुमान बेनीवाल

अनूपगढ़ शाखा में सिंचाई के पानी की मांग को लेकर किसान कई सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे थे। किसानों ने इस संबंध में प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखी थीं और समाधान के लिए समय भी दिया था। शनिवार शाम घड़साना की नई धानमंडी में किसान सभा आयोजित हुई, जिसमें हनुमान बेनीवाल शामिल हुए। सभा के बाद तय समय में मांगों पर ठोस समाधान नहीं होने से किसानों ने श्रीगंगानगर की ओर कूच करने का फैसला किया। रात करीब 10 बजे बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों के साथ आगे बढ़े। पुलिस ने 12 एमडी टोल नाके के पास उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग टूट गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

इसके बाद किसान पतरोड़ा के पेट्रोल पंप के पास नेशनल हाईवे-911 पर बैठ गए। बेनीवाल भी रातभर आंदोलनकारियों के साथ मौजूद रहे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, रविवार सुबह करीब 4 बजे तक वह टोल नाके और धरनास्थल पर किसानों के बीच थे।

किसानों की चार प्रमुख मांगें, पानी के स्थायी इंतजाम पर जोर

श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ क्षेत्र के किसानों का आंदोलन मुख्य रूप से सिंचाई व्यवस्था में सुधार और फसल नुकसान की भरपाई को लेकर है। किसान चाहते हैं कि उनकी मांगों पर केवल अस्थायी आश्वासन देने के बजाय स्थायी समाधान निकाला जाए।

किसानों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • छह महीने का स्थायी सिंचाई रेगुलेशन: अनूपगढ़ शाखा में पानी के वितरण की व्यवस्था तय समय तक स्थायी रूप से लागू की जाए, ताकि किसानों को बुवाई और सिंचाई की योजना बनाने में परेशानी न हो।
  • पर्याप्त पानी की आपूर्ति: चार में से दो समूहों को जरूरत के मुताबिक सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाए, जिससे फसलों की बिजाई समय पर हो सके।
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई: सिंचाई के पानी की आपूर्ति में कथित लापरवाही करने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
  • फसल खराबे का मुआवजा: पानी की कमी और सूखे से प्रभावित फसलों की विशेष गिरदावरी कराई जाए और पात्र किसानों को बीमा क्लेम व मुआवजा दिया जाए।

किसानों का कहना है कि समय पर पानी नहीं मिलने से फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित होने का खतरा है। ऐसे में सिंचाई व्यवस्था का जल्द समाधान जरूरी है।

आंदोलन के बाद प्रशासन अलर्ट, 550 से अधिक जवान तैनात

प्रदर्शन के उग्र होने के बाद प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। घड़साना, रावला, खाजूवाला और मंडी 365 हेड के बाजार बंद रहने की जानकारी सामने आई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और राजस्थान आर्म्ड कांस्टेबुलरी (RAC) के जवानों को तैनात किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में तीन बटालियन सहित 550 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन की प्राथमिकता प्रदर्शन के दौरान किसी अप्रिय घटना को रोकने और यातायात व्यवस्था संभालने की है।

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लिखित समझौते पर अड़े किसान, आगे भी जारी रह सकता है आंदोलन

किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेकर लिखित समझौता नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त करने पर सहमति नहीं बनेगी। सिंचाई के पानी का स्थायी समाधान, फसल खराबे का मुआवजा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई इस विवाद के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

अब सबकी नजर प्रशासन और किसान नेताओं के बीच होने वाली बातचीत पर है। यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है। फिलहाल क्षेत्र में किसानों की मांगों के साथ-साथ सुरक्षा और यातायात व्यवस्था भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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