जयपुर। राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के उम्मीदवारों को इस चुनाव में उसका आधिकारिक चुनाव चिन्ह ‘पतंग’ नहीं मिल पाएगा। निर्वाचन आयोग के फैसले के बाद अब राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने भी AIMIM की चुनाव चिन्ह आवंटित करने की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राजस्थान के निकाय चुनाव में ओवैसी की ‘पतंग’ नहीं उड़ पाएगी। AIMIM के उम्मीदवारों को अब निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरना होगा और उन्हें अलग-अलग वार्डों में उपलब्ध वैकल्पिक चुनाव चिन्हों में से कोई निशान आवंटित किया जाएगा।
AIMIM को ‘पतंग’ सिंबल क्यों नहीं मिला?
राजस्थान में 309 शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उम्मीदवारों को 4 सितंबर को चुनाव चिन्ह मिलने की उम्मीद है। राज्य निर्वाचन आयोग ने AIMIM को राजस्थान में ‘पतंग’ चुनाव चिन्ह देने से इनकार किया है। आयोग की ओर से इसके लिए पार्टी की तेलंगाना में राज्य स्तरीय मान्यता का हवाला दिया गया है। AIMIM ने निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सोमवार को जयपुर हाईकोर्ट में जस्टिस मनीष शर्मा की एकल पीठ ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। लेकिन निकाय चुनाव की प्रक्रिया तब तक आगे बढ़ चुकी होगी, इसलिए मौजूदा चुनाव में AIMIM के प्रत्याशियों को पार्टी के आधिकारिक ‘पतंग’ निशान पर चुनाव लड़ने का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है।
निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरेंगे AIMIM उम्मीदवार
चुनाव आयोग और फिर हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद AIMIM के उम्मीदवारों को अब निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ना होगा। निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए निर्धारित चुनाव चिन्हों में हाथ की चक्की, ऊंट, पलंग, चप्पल, जूता, कैंची, सिलाई मशीन और हारमोनियम सहित कई अन्य निशान शामिल हैं। AIMIM प्रत्याशियों को इन्हीं उपलब्ध चुनाव चिन्हों में से किसी एक का विकल्प चुनना होगा। पार्टी के प्रवक्ता और अधिवक्ता आरिफ मोहम्मद के अनुसार, AIMIM अगली सुनवाई में संशोधित अर्जी दाखिल कर आगामी पंचायत चुनावों में पार्टी को चुनाव चिन्ह आवंटित करने की मांग कर सकती है।
RLP के साथ गठबंधन, जाट-मुस्लिम समीकरण पर नजर
राजस्थान के निकाय चुनाव में AIMIM ने सांसद हनुमान बेनीवाल की RLP के साथ गठबंधन किया है। दोनों दलों के एक साथ आने को राजस्थान की राजनीति में तीसरे विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। AIMIM और RLP की रणनीति खास तौर पर जाट-मुस्लिम समीकरण बनाने पर केंद्रित है। इसी सिलसिले में 6 सितंबर को जयपुर के शास्त्री नगर में असदुद्दीन ओवैसी और हनुमान बेनीवाल की साझा महारैली प्रस्तावित है। हालांकि AIMIM को अपना आधिकारिक चुनाव चिन्ह नहीं मिलने से गठबंधन की रणनीति को चुनौती मिल सकती है। RLP के उम्मीदवार अपने पंजीकृत चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतरेंगे, जबकि AIMIM प्रत्याशियों को अलग-अलग निर्दलीय चुनाव चिन्हों के साथ चुनाव लड़ना पड़ेगा।
क्या AIMIM को हो सकता है नुकसान?
‘पतंग’ जैसे एक समान चुनाव चिन्ह की गैरमौजूदगी AIMIM के लिए चुनावी स्तर पर बड़ी चुनौती बन सकती है। पार्टी के सभी उम्मीदवार अलग-अलग चुनाव चिन्हों पर चुनाव लड़ेंगे, जिससे मतदाताओं के बीच पार्टी की पहचान और प्रत्याशियों के चुनाव चिन्ह को लेकर भ्रम की स्थिति बन सकती है। दूसरी ओर, RLP अपने पंजीकृत चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव मैदान में होगी। ऐसे में गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय स्तर पर दोनों दलों के समर्थकों के बीच वोट ट्रांसफर सुनिश्चित करना होगी। अब देखना होगा कि AIMIM और RLP का यह गठबंधन राजस्थान के निकाय चुनाव में कितना प्रभाव छोड़ पाता है और क्या बिना ‘पतंग’ के ओवैसी की पार्टी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर पाती है।



