जयपुर। राजस्थान में कम बारिश और सूखे की आशंका को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पश्चिमी राजस्थान के प्रभावित इलाकों में किसानों और पशुपालकों को तत्काल राहत देने की मांग उठाई है। वहीं, कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा है कि प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे पूरा होने और अकाल घोषित करने की प्रक्रिया के बाद राहत कार्य शुरू किए जाएंगे। बुधवार को भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि प्रदेश के करीब आठ से दस जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। अधिकारियों और जिला कलेक्टरों के जरिए स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग सर्वे की प्रक्रिया पूरी कर रहा है और रिपोर्ट के आधार पर आगे के कदम उठाए जाएंगे।
राजस्थान के इन जिलों में सूखे जैसे हालात का दावा
पश्चिमी राजस्थान में कम बारिश के कारण फसलों, पशुओं के चारे और पेयजल की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अक्टूबर की शुरुआत में दावा किया था कि जोधपुर के करीब 2,000 गांवों, बाड़मेर के 2,460 गांवों, बालोतरा के 1,216 गांवों और जैसलमेर के 961 गांवों में सूखे जैसे हालात हैं। हालांकि, प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन कृषि और राजस्व विभाग के सर्वे के आधार पर किया जाएगा। कम बारिश का असर किसानों की फसल के साथ पशुपालन, ग्रामीण पेयजल व्यवस्था और आजीविका पर भी पड़ सकता है।
किरोड़ी मीणा बोले- सर्वे के बाद शुरू होंगे राहत कार्य
कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि सरकार को अधिकारियों से लगातार जानकारी मिल रही है। सर्वे पूरा होने के बाद अकाल घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी और उसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू होंगे। गहलोत की ओर से तत्काल कार्रवाई की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए मीणा ने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पर भ्रम फैलाने की कोशिश नहीं करने की बात भी कही।
गहलोत ने की गिरदावरी और राहत शिविर शुरू करने की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर सूखे की गंभीरता को लेकर पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया है। उन्होंने बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर सहित पश्चिमी राजस्थान के इलाकों में पानी और चारे की कमी का मुद्दा उठाया। गहलोत ने प्रभावित क्षेत्रों में जल्द गिरदावरी कराने, सूखाग्रस्त इलाकों की घोषणा करने और राहत कार्य शुरू करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने पशुओं के लिए चारा डिपो खोलने, पेयजल उपलब्ध कराने, पशु राहत शिविर शुरू करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत बताई। उन्होंने राज्य सरकार से प्रभावित किसानों और पशुपालकों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार से सहायता लेने की अपील भी की।
सर्वे रिपोर्ट पर टिकी किसानों और पशुपालकों की नजरें
राजस्थान में सूखे की आशंका के बीच अब प्रभावित क्षेत्रों के सर्वे और प्रशासनिक रिपोर्ट पर नजरें टिकी हैं। किसानों और पशुपालकों को राहत कब और किस स्तर पर मिलेगी, यह सर्वे के निष्कर्षों तथा सरकार के आगामी फैसलों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, सूखे की स्थिति और राहत उपायों को लेकर राज्य सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी जारी है।



