जयपुर। रोशनी, सजावट और खरीदारी के उत्साह के बीच शुक्रवार, 6 नवंबर को धनतेरस के साथ छह दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होगी। इस बार धनतेरस पर राजस्थान के बाजारों में करीब 20 हजार करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है। राजधानी जयपुर में ही लगभग 6 हजार करोड़ रुपये की खरीदारी होने की उम्मीद जताई जा रही है। सोने-चांदी के आभूषणों से लेकर वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और प्रॉपर्टी तक बाजारों में खरीदारी का जोर रहने वाला है।
हस्त नक्षत्र, कुबेर योग और अमृत योग जैसे शुभ संयोगों के बीच लोग भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करेंगे। अबूझ मुहूर्त होने के कारण सुबह से रात तक अलग-अलग चौघड़ियों में खरीदारी की जा सकेगी। बाजारों में आकर्षक रोशनी और सजावट भी दीपोत्सव की रौनक बढ़ाएगी।
देशभर में 7 लाख करोड़ के कारोबार का अनुमान
व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुमान के अनुसार, इस बार देशभर में दीपावली के दौरान करीब 7 लाख करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है। इसमें अकेले धनतेरस पर 3.50 लाख करोड़ से 4 लाख करोड़ रुपये तक की बिक्री का अनुमान है। पिछले साल धनतेरस पर करीब 3 लाख करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। इस बार बिक्री में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। राजस्थान में संभावित कारोबार में वाहन, ज्वैलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, किराना, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स और बर्तन-पूजन सामग्री की बड़ी हिस्सेदारी रहने का अनुमान है।
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सोने-चांदी की खरीदारी पर रहेगी नजर
राजस्थान चैंबर के अध्यक्ष डॉ. केएल जैन के अनुसार, धनतेरस को लेकर बाजार में सकारात्मक माहौल है। नवरात्र के दौरान कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन दीपावली नजदीक आने के साथ बाजार में तेजी देखने को मिल रही है। व्यापारियों ने भी धनतेरस के लिए विशेष तैयारियां की हैं।
सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी के अध्यक्ष कैलाश मित्तल का कहना है कि सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के बाद एक बार फिर तेजी नजर आ रही है। ऐसे में धनतेरस पर इन धातुओं की खरीदारी को लोग शुभ-लाभ और निवेश, दोनों लिहाज से अच्छा अवसर मान रहे हैं।
राजस्थान में धनतेरस पर संभावित कारोबार
| कारोबार का क्षेत्र | अनुमानित कारोबार |
|---|---|
| वाहन | 5,000 करोड़ रुपये |
| ज्वैलरी और सिक्के | 4,000 करोड़ रुपये |
| इलेक्ट्रॉनिक्स | 3,000 करोड़ रुपये |
| कपड़े | 2,000 करोड़ रुपये |
| गिफ्ट आइटम | 1,000 करोड़ रुपये |
| किराना | 1,800 करोड़ रुपये |
| मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, बर्तन और पूजन सामग्री | 2,400 करोड़ रुपये |
सभी आंकड़े उपलब्ध कारोबारी अनुमानों पर आधारित हैं।
धनतेरस पर खरीदारी के शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य एवं बंशीधर पंचांग के निर्माता पं. दामोदर प्रसाद शर्मा के अनुसार, त्रयोदशी तिथि शुक्रवार सुबह 10:31 बजे से शनिवार सुबह 10:48 बजे तक रहेगी। धनतेरस पर शाम 5:37 से रात 8:15 बजे तक प्रदोष काल में यम के निमित्त दीपदान किया जाएगा। भगवान धन्वंतरि की जयंती के साथ मां लक्ष्मी और कुबेर का पूजन भी होगा।
खरीदारी के लिए अलग-अलग चौघड़ियों का समय इस प्रकार है:
| चौघड़िया | समय | खरीदारी के लिए शुभ |
|---|---|---|
| चर | सुबह 6:44 से 8:05 बजे | बर्तन, कपड़े, पूजन सामग्री |
| लाभ और अमृत | सुबह 8:05 से 10:49 बजे | वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना-चांदी |
| शुभ | दोपहर 12:10 से 1:32 बजे | वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावट, आभूषण |
| चर | शाम 4:15 से 5:37 बजे | बर्तन, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिक्के |
| लाभ | रात 8:38 से 10:32 बजे | इलेक्ट्रॉनिक्स, चांदी के सिक्के, आभूषण, बर्तन |
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धनतेरस से भाई दूज तक छह दिन का दीपोत्सव
इस बार दीपोत्सव का उत्सव 6 नवंबर से 11 नवंबर तक मनाया जाएगा। हर दिन का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।
6 नवंबर, शुक्रवार: धनतेरस
भगवान धन्वंतरि के पूजन के साथ यम दीपदान होगा। सोना-चांदी, बर्तन, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीदारी की जाएगी। प्रदोष काल में शाम 5:37 से रात 8:15 बजे तक पूजन और दीपदान का समय रहेगा।
7 नवंबर, शनिवार: रूप चतुर्दशी, काली चौदस और हनुमंत जन्मोत्सव
इस दिन अभ्यंग स्नान, उबटन और दीपदान की परंपरा निभाई जाएगी। शाम 6:15 से 8:15 बजे तक दीपदान का समय रहेगा। हनुमान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होगी।
8 नवंबर, रविवार: महालक्ष्मी पूजन और दीपावली
दीपोत्सव के मुख्य दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, मां सरस्वती और कुबेर की पूजा होगी। लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त शाम 5:36 से रात 8:14 बजे तक रहेगा। सर्वश्रेष्ठ पूजन मुहूर्त शाम 6:16 से 6:28 बजे तक बताया गया है।
9 नवंबर, सोमवार: देवकार्य अमावस्या और सोमवती अमावस्या
इस दिन स्नान, दान और पितरों के निमित्त धार्मिक कार्य किए जाएंगे। भगवान महावीर का मोक्ष कल्याणक दिवस भी मनाया जाएगा। अमावस्या तिथि दोपहर 12:32 बजे तक रहेगी।
10 नवंबर, मंगलवार: गोवर्धन पूजा और अन्नकूट
भगवान श्रीकृष्ण और गोमाता की पूजा की जाएगी। मंदिरों में अन्नकूट महोत्सव आयोजित होंगे और श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की जाएगी।
11 नवंबर, बुधवार: भाई दूज
भाई दूज के साथ छह दिवसीय दीपोत्सव का समापन होगा। बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करेंगी।
इस तरह धनतेरस से शुरू होने वाला दीपोत्सव खरीदारी, पूजा-पाठ और पारिवारिक परंपराओं के साथ छह दिनों तक उत्साह और उल्लास का माहौल बनाए रखेगा।



