Iran US War: अमेरिकी सीनेट में गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की शक्तियों को सीमित करने से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव बेहद करीबी मुकाबले में 49-50 मतों से खारिज हो गया। वोटिंग के दौरान पेंसिल्वेनिया से रिपब्लिकन सीनेटर डेव मैकॉर्मिक अनुपस्थित रहे। उनकी गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही, क्योंकि उनके मतदान की स्थिति में परिणाम अलग हो सकता था।
प्रस्ताव में क्या था?
प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि राष्ट्रपति ईरान के खिलाफ कोई भी नई सैन्य कार्रवाई शुरू करने से पहले अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी लें. यदि यह प्रस्ताव पारित हो जाता, तो राष्ट्रपति अकेले सैन्य कार्रवाई का निर्णय नहीं ले सकते थे.
यह प्रस्ताव फिलहाल सीनेट की विदेश मामलों की समिति से जुड़ी प्रक्रिया में है. इसे पेश करने वाले सांसद चाहते थे कि इसे सीधे पूरे सीनेट के समक्ष चर्चा और मतदान के लिए लाया जाए, लेकिन आवश्यक समर्थन नहीं मिलने के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका.
ट्रंप के हमलों के बाद उठी मांग
हाल के हफ्तों में ईरान पर अमेरिकी हवाई हमलों के बाद विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों और कुछ रिपब्लिकन सदस्यों ने मांग की थी कि युद्ध जैसे बड़े फैसलों में कांग्रेस की भूमिका सुनिश्चित की जाए. इन सांसदों का तर्क है कि अमेरिकी संविधान के अनुसार युद्ध घोषित करने का अधिकार कांग्रेस के पास है, इसलिए व्यापक सैन्य कार्रवाई से पहले संसद की मंजूरी आवश्यक होनी चाहिए.
हालांकि, सीनेट में रिपब्लिकन बहुमत ने प्रस्ताव का विरोध किया. उनका कहना है कि विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामलों में राष्ट्रपति को परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए.
केश्म द्वीप हमले पर ईरान की अमेरिका को चेतावनी
इस बीच ईरान की ओर से भी अमेरिकी कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने आरोप लगाया कि केश्म द्वीप पर हुई अमेरिकी बमबारी में नागरिकों की मौत के लिए अमेरिका पूरी तरह जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि नागरिक ठिकानों पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है और अमेरिका को इसकी “कीमत चुकानी होगी.”
हालांकि, केश्म द्वीप पर कथित हमले में हताहतों की संख्या की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. ईरानी सरकारी मीडिया ने कई आम नागरिकों के मारे जाने का दावा किया है, जबकि अमेरिकी पक्ष की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
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