नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संसद में राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद और महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार हनन का नोटिस सौंपते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर सदन को कथित रूप से भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले की जांच कराने और संसदीय नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की मांग की है।
नोटिस में कहा गया है कि संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर हुई चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा था कि इस सैन्य अभियान के दौरान किसी भारतीय सैनिक की जान नहीं गई। हालांकि बाद में अभियान से जुड़े छह सैन्यकर्मियों के शहीद होने की जानकारी सामने आई। कांग्रेस का आरोप है कि दोनों तथ्यों में स्पष्ट अंतर होने के कारण सदन को सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। वेणुगोपाल ने अपने नोटिस में कहा है कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और मंत्रियों की जिम्मेदारी होती है कि वे सदन के सामने पूरी तरह सही और तथ्यात्मक जानकारी रखें।
उनका कहना है कि यदि किसी मंत्री द्वारा गलत या अधूरी जानकारी दी जाती है तो यह संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन माना जा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव पर विचार करने की मांग की है। दूसरी ओर, सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि रक्षा मंत्री के बयान को उसके पूरे संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, सदन में दिया गया बयान एक विशेष संदर्भ में था और उसमें किसी प्रकार की जानकारी छिपाने या संसद को गुमराह करने का उद्देश्य नहीं था।
साथ ही सरकार ने यह भी कहा कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी सैनिकों का पूरा सम्मान किया गया है और उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष सरकार से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, जबकि सत्तापक्ष अपने रुख पर कायम है और आरोपों को निराधार बता रहा है। दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी भी देखने को मिल रही है।
अब इस पूरे मामले में अगला कदम लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय पर निर्भर करेगा। यदि विशेषाधिकार नोटिस स्वीकार किया जाता है तो संसदीय नियमों के तहत इसकी जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।



