Saturday, August 15, 2026
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सऊदी में पाकिस्तानी सैनिकों की मौत का दावा, 50 जवानों के मारे जाने की खबर से बढ़ी शहबाज सरकार की मुश्किलें!

सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग के बीच पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती को लेकर नए दावे सामने आए हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले 20 दिनों में सऊदी क्षेत्र में यमन से हुए हमलों के दौरान 50 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं और उनके अंतिम संस्कार को सार्वजनिक न करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इन मौतों और कथित गोपनीय अंतिम संस्कारों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इतना जरूर है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब में करीब 8,000 सैनिकों, लड़ाकू विमानों और एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती की है। हाल के दिनों में हूती हमलों के कारण सऊदी की सुरक्षा स्थिति भी गंभीर हुई है।

नई दिल्ली। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा सहयोग के बीच पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती चर्चा में है। सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी अरब की सीमाओं पर यमन से जुड़े हमलों के दौरान पिछले करीब 20 दिनों में 50 से ज्यादा पाकिस्तानी जवानों की मौत हुई है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मृत सैनिकों के शव उनके परिवारों को सौंपे जा रहे हैं और अंतिम संस्कार को सार्वजनिक नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, 50 से अधिक सैनिकों की मौत और सरकार द्वारा इसे छिपाने के दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इसलिए इस आंकड़े को फिलहाल दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

पाकिस्तान ने सऊदी में भेजे हैं हजारों सैनिक

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने 2026 में सऊदी अरब में करीब 8,000 सैनिक, लड़ाकू विमानों की एक स्क्वाड्रन और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया है। रिपोर्ट में करीब 16 JF-17 लड़ाकू विमानों की तैनाती का भी उल्लेख है। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने अप्रैल में भी पुष्टि की थी कि पाकिस्तानी सैन्य बल, जिनमें लड़ाकू और सपोर्ट विमान शामिल हैं, किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पहुंचे हैं। यह तैनाती दोनों देशों के रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत की गई थी।

रक्षा समझौते के बाद बढ़ा सैन्य सहयोग

पाकिस्तान और सऊदी अरब ने सितंबर 2025 में Strategic Mutual Defence Agreement पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत एक देश पर होने वाली आक्रामक कार्रवाई को दोनों के खिलाफ हमला माना जा सकता है। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और संयुक्त रक्षा क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया तेज हुई है। जुलाई 2026 में हूती हमलों के बाद पाकिस्तान ने भी सऊदी अरब के साथ हुए रक्षा समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी।

हूती हमलों से सऊदी की सुरक्षा चुनौती बढ़ी

यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब और लाल सागर से जुड़े ठिकानों पर हमले क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। अगस्त में हूतियों ने सऊदी अरब के जिजान स्थित अरामको रिफाइनरी पर ड्रोन हमला भी किया था। यह हमला सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के नए रक्षा समझौते के कुछ ही दिनों बाद हुआ। हूती हमलों के कारण लाल सागर का समुद्री मार्ग भी रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

पाकिस्तान के लिए बढ़ी रणनीतिक चुनौती

पाकिस्तान एक ओर सऊदी अरब के साथ अपने रक्षा संबंध मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय तनाव के बीच कूटनीतिक भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सऊदी की सुरक्षा में बढ़ती सैन्य भागीदारी पाकिस्तान के लिए रणनीतिक और राजनीतिक दोनों तरह की चुनौतियां पैदा कर सकती है। पाकिस्तान की सऊदी तैनाती में सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त रक्षा क्षमता बढ़ाना, महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा और एयर डिफेंस जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं। हालांकि, सैनिकों की कथित बड़ी संख्या में मौत और उन्हें गुप्त रूप से दफनाने के दावे की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

तुर्किये के साथ भी रक्षा सहयोग

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने अगस्त 2026 में Mecca Joint Defence Agreement पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते में किसी एक सदस्य पर हमला होने की स्थिति में सामूहिक रक्षा का प्रावधान है। तुर्किये ने इसे किसी विशेष देश के खिलाफ गठबंधन नहीं बताया है। इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की सैन्य और कूटनीतिक भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।

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