नई दिल्ली। नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ और मडस्लाइड के बाद चीन के तिब्बत क्षेत्र में आपदा से जुड़ी सूचनाओं और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। चीनी अधिकारियों ने गिरोंग पोर्ट की आपदा से जुड़ी कथित गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में 10 लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी है। 26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर और मलबे से जुड़ी घटना के बाद अचानक आई बाढ़ और मडस्लाइड ने दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मचाई। तिब्बत के गिरोंग पोर्ट पर भी बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ और सैकड़ों लोग लापता बताए गए।
चीन में 10 लोगों पर क्यों हुई कार्रवाई?
चीनी अधिकारियों के अनुसार कुछ इंटरनेट यूजर्स ने आपदा से जुड़ी ऐसी जानकारी ऑनलाइन साझा की, जिसे प्रशासन ने बिना पुष्टि के और भ्रामक बताया। अधिकारियों का दावा है कि कुछ पोस्ट में मृतकों और लापता लोगों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक ऐसे मामलों में कम से कम 10 लोगों पर कार्रवाई की गई। एक मामले में ‘क्यू’ नाम के यूजर पर कथित तौर पर बिना प्रमाण के मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर पोस्ट करने के आरोप में प्रशासनिक कार्रवाई की गई। दूसरे मामले में ‘लिऊ’ नाम के यूजर ने चीनी हिस्से में 3,000 से ज्यादा मौतों का दावा किया, जिसे अधिकारियों ने गलत बताया।
चीन का आधिकारिक आंकड़ा क्या है?
चीनी अधिकारियों के मुताबिक 30 अगस्त तक तिब्बत के गिरोंग पोर्ट क्षेत्र में 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता हैं। इनमें 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। चीन की ओर से 2,141 से ज्यादा बचावकर्मियों को अभियान में लगाया गया है। इस बीच नेपाल में आपदा का असर कहीं ज्यादा व्यापक रहा है। 31 अगस्त की रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में मृतकों की संख्या 903 तक पहुंच चुकी थी और 4,247 से अधिक लोग लापता थे।
सोशल मीडिया पर वीडियो हटाने के आरोप
आपदा के बाद गिरोंग पोर्ट और आसपास के इलाकों से सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। तिब्बत से जुड़ी गतिविधियों पर चीन का सख्त सूचना नियंत्रण लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। कुछ तिब्बत समर्थक समूहों और रिपोर्टों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर साझा की जा रही आपदा की तस्वीरों और सूचनाओं पर नियंत्रण किया जा रहा है। हालांकि, सोशल मीडिया से किसी खास वीडियो को चीनी अधिकारियों ने व्यवस्थित रूप से हटाने का आधिकारिक कारण इस आधार पर स्पष्ट नहीं किया है। इसलिए इस दावे को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
तिब्बत में आपदा और सेंसरशिप का मुद्दा
तिब्बत चीन के लिए बेहद संवेदनशील राजनीतिक और सुरक्षा क्षेत्र है। यहां सूचना, मीडिया और ऑनलाइन गतिविधियों पर कड़े नियंत्रण को लेकर पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। इसी वजह से मौजूदा आपदा में भी यह बहस तेज हो गई है कि प्राकृतिक आपदा से जुड़ी वास्तविक तस्वीर कितनी स्वतंत्र रूप से सामने आ रही है। आलोचकों का कहना है कि सीमित स्वतंत्र जानकारी के कारण प्रभावित लोगों की वास्तविक स्थिति और नुकसान का स्वतंत्र आकलन मुश्किल हो सकता है।
2020 के कोरोना दौर से तुलना क्यों?
आपदा के बाद चीन की सूचना नीति की तुलना कुछ लोग 2020 में कोरोना महामारी के शुरुआती दौर से कर रहे हैं, जब वुहान में बीमारी से जुड़ी सूचनाओं और स्थानीय डॉक्टरों की भूमिका को लेकर चीन की सरकार की आलोचना हुई थी। हालांकि दोनों घटनाएं अलग परिस्थितियों से जुड़ी हैं और मौजूदा बाढ़ में चीन की कार्रवाई को सीधे 2020 के कोरोना घटनाक्रम के समान मानना उचित नहीं होगा। लेकिन दोनों मामलों में सरकारी सूचना और स्वतंत्र रूप से सामने आने वाली जानकारी के बीच अंतर को लेकर बहस जरूर देखने को मिल रही है।
असली नुकसान कितना? यही सबसे बड़ा सवाल
गिरोंग पोर्ट की आपदा में आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी है। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। वहीं, तिब्बत की जमीनी स्थिति पर स्वतंत्र जानकारी सीमित होने के कारण नुकसान का पूरा आकलन करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बचाव अभियान के साथ-साथ प्रभावित इलाकों से जुड़ी जानकारी कितनी पारदर्शिता के साथ सामने आती है। फिलहाल चीन की ओर से बचाव और राहत अभियान जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है।



