नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात अभी पूरी तरह सामान्य भी नहीं हुए हैं कि अब दोबारा बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। पहाड़ी इलाकों में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से नदियों का रास्ता बाधित होने और अचानक बड़े पैमाने पर पानी नीचे आने की आशंका जताई जा रही है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1,127 लोगों की मौत की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 4,800 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल होने की बात कही गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और खोज अभियान लगातार जारी है।
ग्लेशियर पिघलने से बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के मुताबिक हिंदू कुश हिमालय में ग्लेशियर तेजी से बर्फ खो रहे हैं। पहाड़ों पर बर्फ और चट्टानों के खिसकने से नदियों के रास्ते में अस्थायी रुकावट पैदा हो सकती है। अगर ऐसे किसी अवरोध के पीछे बड़ी मात्रा में पानी जमा हुआ और अचानक रास्ता टूटा, तो नीचे के इलाकों में फ्लैश फ्लड का खतरा पैदा हो सकता है। नेपाल प्रशासन ने भी कई इलाकों में लोगों को सतर्क रहने और खतरा महसूस होने पर तुरंत ऊंचे तथा सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
तीन बड़ी नदियां चेतावनी स्तर के ऊपर
लगातार बारिश और बाढ़ के बाद नेपाल की सुन कोशी, बूढ़ी गंडकी और महाकाली नदियों का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन ने मध्य, पश्चिमी और पूर्वी नेपाल के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा है। लोगों को नदी किनारे और निचले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
अमेरिकी रेस्क्यू टीम भी पहुंची नेपाल
राहत और बचाव अभियान में मदद के लिए अमेरिका की Crisis Response International (CRI) की 13 सदस्यीय टीम नेपाल पहुंच गई है। यह टीम रसुवा जिले के चिलिमे क्षेत्र में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में लापता लोगों की तलाश में मदद करेगी। टीम विशेष उपकरणों की मदद से सुरंगों के अंदर फंसे लोगों की आवाज या किसी तरह की हलचल का पता लगाने की कोशिश करेगी।
भारत ने भेजी पांचवीं राहत उड़ान
नेपाल में राहत और बचाव अभियान के लिए भारत ने अपनी पांचवीं सहायता उड़ान भी रवाना की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। इस उड़ान में 11 सदस्यीय विशेष रेस्क्यू टीम, आधुनिक बचाव उपकरण और 5.5 टन जरूरी दवाइयां भेजे जाने की जानकारी दी गई है। इससे पहले भारत चार राहत उड़ानों के जरिए करीब 68.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। इसमें दवाइयां, खाद्य सामग्री, कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, हाइजीन किट और दूसरी आवश्यक चीजें शामिल हैं।
सोनू सूद भी पहुंचे काठमांडू
बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए अभिनेता सोनू सूद भी काठमांडू पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और राहत सामग्री का वितरण किया। सोनू सूद ने कहा कि उनकी टीम बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने के साथ उनकी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश करेगी। उन्होंने लंबे समय तक नेपाल के प्रभावित लोगों की मदद जारी रखने की बात भी कही।
अज्ञात शवों को जलाने की जगह दफनाया जा रहा
नेपाल में बड़ी संख्या में अज्ञात शवों की पहचान करना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। पानी और कीचड़ में लंबे समय तक रहने के कारण कई शवों की हालत खराब हो गई है, जिससे पहचान मुश्किल हो रही है। बताया जा रहा है कि DNA जांच के लिए शवों के अवशेष सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कई अज्ञात शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। शवगृह और अस्थायी केंद्रों में जगह की कमी के कारण भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
चितवन से सबसे ज्यादा शव बरामद
बाढ़ के बाद अलग-अलग इलाकों में शवों की बरामदगी लगातार जारी है। जानकारी के मुताबिक, चितवन से सबसे ज्यादा 348 शव बरामद किए गए हैं। बचाव दल, सुरक्षाबल और राहतकर्मी प्रभावित इलाकों के साथ-साथ नदियों के निचले हिस्सों में भी लगातार खोज अभियान चला रहे हैं।
यूपी में मिले नेपाल के पांच नागरिकों के शव
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से मिले नेपाल के पांच नागरिकों के शव मंगलवार को सोनौली सीमा पर नेपाली अधिकारियों को सौंपे गए। बताया गया कि ये लोग नेपाल में आई अचानक बाढ़ के दौरान बह गए थे। बरामद शवों में दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। शवों को नेपाल पुलिस को सौंप दिया गया है, ताकि उनकी पहचान और अंतिम प्रक्रिया पूरी की जा सके। नेपाल में राहत अभियान जारी है, लेकिन अब संभावित दूसरी बाढ़ का खतरा प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में मौसम, नदियों के जलस्तर और पहाड़ी क्षेत्रों की स्थिति पर खास नजर रखी जा रही है।
एक लड़की ने खोए परिवार के 17 सदस्य
इस आपदा ने नेपाल में कई परिवारों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। बाढ़ प्रभावित बिदुर में अस्थायी शिविरों में रह रहे लोगों के बीच अब राहत के साथ दोबारा बाढ़ आने का डर भी बना हुआ है। एक नेपाली लड़की ने बताया कि इस विनाशकारी आपदा में उसने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। ऐसे परिवारों के लिए अपनों की तलाश और अंतिम संस्कार का इंतजार सबसे बड़ी त्रासदी बन गया है।



