Friday, July 24, 2026
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Manipur Violence : सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालतों का दिया सुझाव, CBI-SIT को जांच जल्द पूरी करने के निर्देश

उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर जातीय हिंसा से जुड़े मामलों की प्रतिदिन सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने का सुझाव दिया। अदालत ने सीबीआई और एसआईटी को लंबित जांच जल्द पूरी करने, पीड़ितों को एक सप्ताह में आरोपपत्रों की प्रतियां देने और राज्य सरकार को जांच में पूरा सहयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

Manipur Violence : नई दिल्ली। मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने हिंसा से संबंधित आपराधिक मामलों की प्रतिदिन सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन का सुझाव दिया है। साथ ही, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और राज्य के विशेष जांच दल (SIT) को लंबित जांच जल्द पूरी करने तथा पीड़ितों को आरोपपत्रों की प्रतियां समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि कई पीड़ितों और उनके परिजनों को अब तक CBI और SIT द्वारा दाखिल आरोपपत्रों की प्रतियां नहीं मिली हैं। अदालत ने कहा कि विधिक सहायता वकीलों के संपर्क करने के एक सप्ताह के भीतर जांच एजेंसियां आरोपपत्र उपलब्ध कराएं।

विशेष अदालतों के गठन का प्रस्ताव

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच में हो रही देरी को देखते हुए मणिपुर सरकार, मणिपुर हाईकोर्ट और गुवाहाटी हाईकोर्ट की सहमति से विशेष अदालतें गठित की जा सकती हैं, ताकि मामलों की रोजाना सुनवाई हो सके। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया तभी संभव होगी, जब CBI और SIT अपनी जांच पूरी कर आरोपपत्र दाखिल करें।

पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से उन मामलों का पूरा ब्यौरा मांगा है, जिनमें आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं और जिनकी जांच अभी लंबित है। इससे यह तय किया जाएगा कि मामलों के निस्तारण के लिए कितनी विशेष अदालतों की जरूरत होगी।

जांच एजेंसियों को दिए अहम निर्देश

अदालत ने CBI, SIT और न्यायालय द्वारा नियुक्त निगरानी समिति को नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, मणिपुर सरकार से जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराने को कहा गया है। अदालत ने मणिपुर हाईकोर्ट को हिंसा के बाद लापता हुए 30 लोगों के मामलों पर भी विचार करने का निर्देश दिया।

अब तक की जांच की स्थिति

स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, CBI ने 21 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए हैं, जबकि 11 मामलों की जांच जारी है। तीन मामलों में क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की जा चुकी है और चार मामले अभी जांच के अधीन हैं।

वहीं, राज्य SIT आठ जिलों में दर्ज 3,020 मामलों की जांच कर रही है। इनमें 301 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं और 10 मामलों में ट्रायल शुरू हो चुका है। SIT ने इन मामलों में करीब 2,924 गवाहों को सूचीबद्ध किया है।

जांच में कई व्यावहारिक चुनौतियां

सुप्रीम कोर्ट को CBI ने बताया कि जांच के दौरान गवाहों का विस्थापन, समुदायों के बीच अविश्वास, भाषा संबंधी समस्याएं और हिंसा के दौरान लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से डिजिटल साक्ष्य जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अदालत ने इन चुनौतियों को स्वीकार करते हुए कहा कि लंबित जांच निर्धारित समय-सीमा में पूरी की जानी चाहिए, ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके।

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Mukesh Kumar
Mukesh Kumarhttps://jagoindiajago.news/
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