(प्रज्ञा पांडे)। मान लीजिए रात के 2 बज रहे हैं। आपका पार्टनर आपके बगल में गहरी नींद सो रहा है। उनका फोन टेबल पर रखा है, स्क्रीन पर एक नोटिफिकेशन चमकता है। अचानक आपके दिल की धड़कन बढ़ जाती है। आपके अंदर से एक आवाज़ आती है “बस एक बार देख ले, क्या पता किससे बात हो रही हो?” आप दबे पाँव जाते हैं, फोन उठाते हैं, चैट्स खंगालते हैं… कुछ नहीं मिलता। आप राहत की सांस लेते हैं और सो जाते हैं। कहानी खत्म? बिलकुल नहीं! क्योंकि अगली रात ठीक 2 बजे, वही कहानी, वही बेचैनी और वही फोन चेकिंग की कहानी फिर से शुरू हो जाती है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो रुकिए। सोशल मीडिया इसे ‘रिलेशनशिप ड्रामा’ या ‘पार्टनर पर हक जताना’ कहकर मज़े ले सकता है, लेकिन मेडिकल साइंस की भाषा में इसे ROCD कहते हैं। और यकीन मानिए, ये कोई आम शक नहीं, बल्कि दिमाग का एक खतरनाक जाल है।
क्या आपको पता है असल में OCD क्या है?
जब भी हम ‘OCD’ (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) सुनते हैं, हमारे दिमाग में क्या आता है? वही न जो इंसान दिन में 50 बार हाथ धोता है, या घर से निकलते वक्त ताले को तब तक खींचता है जब तक कि हैंडल हाथ में न आ जाए। लेकिन बॉस, OCD सिर्फ साफ-सफाई या तालों तक सीमित नहीं है। विज्ञान कहता है कि OCD असल में दिमाग का एक अंतहीन लूप है।
इसके दो खिलाड़ी होते हैं-
1.ऑब्सेशन: दिमाग में आने वाला वो अनचाहा, डरावना विचार जिसे आप सोचना नहीं चाहते, पर वो भूत की तरह चिपक जाता है।
2.कंपल्शन: उस भूत से बचने के लिए मजबूरी में की गई हरकत। जैसे- गैस खुली होने का डर आया (ऑब्सेशन), तो आप बिस्तर से उठकर 10 बार चेक करने गए (कंपल्शन)…यानी जब तक आप वो हरकत नहीं करेंगे, आपका दिमाग आपको चैन की सांस नहीं लेने देगा।
जब यह बीमारी बन जाती है ‘लव-ओसीडी’
अब जरा सोचिए, क्या हो अगर यही ओसीडी बीमारी आपकी लव-लाइफ पर अटैक कर दे? इसी को कहते हैं ROCD (Relationship OCD)….इसमें बीमारी का विलेन साफ-सफाई नहीं है। बल्कि यहाँ विलेन है बेवजह आपके अपने पार्टनर (चाहे वो लड़का हो या लड़की) पर आने वाला वो भयानक शक, जिसे आप खुद भी पसंद नहीं करते। यहाँ दिमाग में ‘गैस खुली रहने’ का डर नहीं आता, बल्कि यह विचार आता है “क्या वो मुझसे सच में प्यार करता है”, “कही उसका कोई पास्ट तो नहीं है” या “कहीं वो पीठ पीछे किसी और से तो नहीं जुड़ रही/या रहा?
स्मार्टफोन है ‘लव-ओसीडी’ बीमारी का सबसे बड़ा हथियार!
आज के डिजिटल जमाने में ROCD से पीड़ित इंसान के लिए उसका स्मार्टफोन एक ड्रग्स की तरह काम करता है। इसका लूप कुछ इस तरह दिखता है-
ट्रिगर: पार्टनर ने किसी के पोस्ट पर लाइक किया या रात को उनका फोन बिजी आया।
दिमाग का टॉर्चर : “वो पक्का मुझे धोखा दे रहा/रही हैं।” अब दिल तेजी से धड़कने लगेगा, पसीना आने लगेगा।
लाचारी में उठाया कदम: इस भयानक घबराहट को शांत करने के लिए आप उनका फोन चेक करना चाहते हैं, पासवर्ड्स हैक करने की कोशिश करते हैं, या दिन में 100 बार पूछते हैं “तुम मुझसे प्यार करते हो न?”, “फोन पिक नहीं किया तो दिमाग में 100 तरह के नेगेटिव ख्याल आना”
क्षणिक सुकून: मोबाइल में कुछ नहीं मिला, तो 5 मिनट के लिए शांति मिली। लेकिन अगले ही पल दिमाग कहेगा “शायद उसने चैट डिलीट कर दी होगी”…और शक का खेल दोबारा शुरू
मिथ “अरे भाई, ये तो नॉर्मल शक है”…जी नहीं, साइंटिस्ट्स की सुनिए
आपको लग सकता है कि यार, प्यार में थोड़ा-बहुत शक तो सब करते हैं। लेकिन डॉक्टरों और ब्रेन स्कैन्स ने साबित किया है कि ROCD 100% एक असली मेडिकल कंडीशन है। यह कोई आम ओवरथिंकिंग नहीं है।आम शक और ROCD में जमीन-आसमान का फर्क है-
1) घंटों की बर्बादी: ROCD का मरीज दिन में 1 या 2 घंटे नहीं, बल्कि पूरा दिन सिर्फ इसी चिंता में और फोन चेक करने में निकाल देता है। उनकी नौकरी, पढ़ाई, रिश्ते सब दांव पर लग जाते है।
2) आपकी चॉइस नहीं है: एक आम इंसान मजे या उत्सुकता में पार्टनर का फोन देख सकता है। लेकिन ROCD का मरीज रोते हुए, गुस्सा करते हुए, परेशान होकर फोन चेक करने की कोशिश करता है। वो यह करना नहीं चाहता, लेकिन उसका दिमाग उसे मजबूर कर देता है।
तो क्या इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने का कोई रास्ता है?
बिलकुल है…अच्छी बात यह है कि जैसे हाथ धोने वाले OCD का इलाज होता है, वैसे ही इसका भी मुमकिन है। मनोवैज्ञानिक इसके लिए एक खास तकनीक अपनाते हैं जिसे ERP (Exposure and Response Prevention) कहते हैं। आसान शब्दों में कहें तो मरीज को सिखाया जाता है कि जब दिमाग में पार्टनर पर शक का भूत जागे, तो बिना उनका फोन छुए, बिना उसके सोशल मीडिया अकाउंट को स्टॉक करे, बिना उनसे सवाल किए, उस बेवजह घबराहट को दूर कर अपने पार्टनर से बात करना, रिलेक्स रहना है। धीरे-धीरे दिमाग को समझ आ जाता है कि “कोई खतरा नहीं है” और यह लूप टूट जाता है। तो अगली बार जब पार्टनर के फोन की तरफ हाथ बढ़े या पार्टनर के सोशल मीडिया को स्टॉक करे, तो पहले खुद से पूछिए यह आपका प्यार है, शक है, या फिर दिमाग का कोई छिपा हुआ खेल? क्योकि प्यार में शक नहीं बल्कि शांति, धैर्य और भरोसा ही आपके रिश्ते को मजबूत बनाता है।



