जयपुर (प्रज्ञा पांडे):जयपुर में शहरी परिवहन को मजबूत करने के लिए जयपुर मेट्रो फेज-2 की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। पीएम मोदी आज राजस्थान को देंगे ₹1.06 लाख करोड़ की सौगात, जयपुर मेट्रो फेज-2 का शिलान्यास और पचपदरा रिफाइनरी का करेंगे उद्घाटन।इस प्रस्तावित परियोजना को शहर की अब तक की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट योजनाओं में से एक माना जा रहा है। इसके तहत लगभग 41 किलोमीटर लंबा उत्तर–दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, जिसमें कुल 36 स्टेशन बनाए जाएंगे।इस परियोजना की अनुमानित लागत 13,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इसका निर्माण राजस्थान मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMRCL) के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की 50-50 प्रतिशत भागीदारी होगी।
कहां से कहां तक होगा रूट?
प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर जयपुर के कई महत्वपूर्ण रिहायशी, औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को जोड़ेगा। शुरुआती जानकारी के अनुसार इसका रूट प्रहलादपुरा से टोड़ी मोड़ तक प्रस्तावित है। इस मेट्रो लाइन से शहर के प्रमुख इलाके सीधे जुड़ेंगे, जिनमें शामिल हैं—
प्रहलादपुरा, सीतापुरा, इंडस्ट्रियल एरिया, वीकेआईए (VKI Area),जयपुर एयरपोर्ट, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल, स्टेडियम क्षेत्र, कलेक्ट्रेट, जयपुर रेलवे स्टेशन, अंबाबाड़ी ,विद्याधर नगर, हरमाड़ा, पानीपेच ,गांधी नगर, बीटू बाईपास
इस रूट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एयरपोर्ट (भूमिगत स्टेशन प्रस्तावित), रेलवे स्टेशन, बड़े अस्पताल और इंडस्ट्रियल हब सभी को एक ही मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
पहला निर्माण पैकेज:
12 किलोमीटर का काम शुरू इस परियोजना के पहले चरण में प्रहलादपुरा से पिंजरापोल गोशाला तक करीब 12 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण किया जाएगा। इस पैकेज में शामिल है,लगभग 10 एलिवेटेड मेट्रो स्टेशन,मेट्रो डिपो तक स्पर लाइन,अनुमानित लागत 918.04 करोड़ रुपये से अधिक इस हिस्से में शामिल स्टेशन होंगे—
प्रहलादपुरा, मानपुरा ,बीलवा ,कलां, बीलवा, गोनेर मोड़. सीतापुरा ,JECC (जयपुर एग्ज़िबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर) ,कुंभा मार्ग ,हल्दीघाटी गेट ,पिंजरापोल गोशाला,
अब तक इस पैकेज के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड (LOA) जारी किया जा चुका है और आगे अन्य पैकेजों पर चरणबद्ध तरीके से काम होगा।पहले चरण के निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत के साथ परियोजना आगे बढ़ रही है। बाकी हिस्सों की डिटेल्ड प्लानिंग और पैकेजिंग के आधार पर निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
शहर को क्या फायदा होगा?
यह मेट्रो कॉरिडोर पूरा होने के बाद जयपुर की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा,दैनिक यात्रियों की संख्या 50,000 से बढ़कर करीब 2.5 लाख तक पहुंचने का अनुमान,शहर में ट्रैफिक दबाव में कमी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और औद्योगिक क्षेत्रों तक तेज कनेक्टिविटी,यात्रा समय में बड़ी बचत,पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा,सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक समय-सीमा घोषित नहीं की गई है, लेकिन इस स्तर की बड़ी परियोजनाओं को पूरा होने में आमतौर पर लगभग 5 वर्ष या उससे अधिक समय लग सकता है।
टाइमलाइन की हकीकत: कब तक पूरा होगा सफर?
हालांकि राजनीतिक स्तर पर इस योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक और तकनीकी हकीकत कुछ और कहती है। चूंकि इस पूरे 41 किलोमीटर के रूट में कलेक्ट्रेट और रेलवे स्टेशन जैसे घने इलाकों के अलावा एयरपोर्ट के पास भूमिगत (Underground) टनलिंग का पेचीदा काम शामिल है, इसलिए इस स्तर के प्रोजेक्ट को पूरा होने में समय लगना तय है।
सरकार की ओर से फिलहाल किसी अंतिम आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की गई है। लेकिन बुनियादी ढांचा विशेषज्ञों (Infrastructure Experts) का अनुमान है कि यदि निर्माण कार्य बिना किसी नीतिगत या वित्तीय रुकावट के सुचारू रूप से चलता रहा, तो साल 2030-2031 तक इस रूट पर आंशिक संचालन (Partial Operation) देखने को मिल सकता है। जयपुर के नागरिकों के लिए यह सफर सहूलियत भरा जरूर होगा, लेकिन इसके लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा।



