Monday, November 2, 2026
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ईरान-अमेरिका वार्ता के दौरान अराघची और गालिबाफ को मारना चाहता था इजराइल ! बड़ी साजिश का खुलासा

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दौरान इजरायल ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। कथित तौर पर अमेरिका ने शांति प्रयासों को बचाने के लिए इजरायल को ऐसा कदम उठाने से रोका और ईरान को संभावित खतरे से आगाह किया। एक रिपोर्ट में दावा।

Israel Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति वार्ता के दौरान इजरायल द्वारा ईरान के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाने की योजना बनाए जाने का दावा सामने आया है. द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ निशाने पर थे.

अमेरिका ने किया अलर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में शुरू हुई कथित वार्ता के दौरान अमेरिकी प्रशासन को आशंका थी कि यदि बातचीत में शामिल ईरानी नेताओं पर हमला होता है, तो शांति प्रयास पूरी तरह विफल हो सकते हैं. इसी कारण अमेरिका ने क्षेत्र के कुछ देशों के माध्यम से ईरान को संभावित सुरक्षा खतरे के प्रति सतर्क करने की कोशिश की थी.

अराघची और गालिबाफ को निशाना बनाने की थी योजना

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अब्बास अराघची और मोहम्मद बाकर गालिबाफ युद्धविराम और संभावित शांति समझौते से जुड़ी बातचीत में अहम भूमिका निभा रहे थे. यही वजह थी कि दोनों नेताओं को टारगेट पर रखा गया था. एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह भी कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ने कथित तौर पर इजरायल से ऐसे किसी कदम से बचने का आग्रह किया था.

पाकिस्तान यात्रा के दौरान था खतरा

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि अप्रैल में पाकिस्तान की यात्रा के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं थीं. तेहरान को आशंका थी कि यात्रा के दौरान इजराइल हमला कर सकता है. यही वजह थी कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल को लेकर जा रहे विमान को पाकिस्तान ने लड़ाकू विमान की सुरक्षा दी थी.

दावा किया गया है कि संभावित खतरे को देखते हुए प्रतिनिधिमंडल के विमान को तेहरान के बजाय मशहद हवाई अड्डे पर उतारा गया, जो पाकिस्तान की सीमा के करीब है. जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल सड़क मार्ग से यात्रा कर तेहरान पहुंचकर यात्रा पूरी की. हालांकि, रिपोर्ट में किए गए इन दावों की किसी स्वतंत्र एजेंसी या आधिकारिक स्रोत ने पुष्टि नहीं की है। इजरायल, अमेरिका और ईरान की सरकारों ने भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.

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