Iran US Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर इजराइल ने खुलकर आपत्ति दर्ज कराई है. इजराइल ने इस पीस डील को मानने से साफ इनकार कर दिया है. इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान, सीरिया और गाजा में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्रों से पीछे नहीं हटेगी और इन इलाकों में अनिश्चितकाल तक तैनात रहेगी.
‘हम अमेरिका के गुलाम नहीं हैं’
वहीं, इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने भी प्रस्तावित समझौते पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हम अमेरिका के गुलाम नहीं हैं. इजराइल एक स्वतंत्र देश है. हम अपनी सुरक्षा से जुड़े फैसले खुद करेगा और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह समझौता इजराइल पर लागू नहीं होता.” उनके इस बयान ने साफ संकेत दिया है कि तेल अवीव अमेरिकी पहल से दूरी बनाकर अपनी सुरक्षा नीति पर कायम रहना चाहता है.
19 जून को जेनेवा में समझौता साइन होने का दावा
दूसरी ओर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर 19 जून को जेनेवा में हस्ताक्षर हो सकते हैं. यदि यह समझौता होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय आधिकारिक बैठक होगी.
इजराइल की सैन्य मौजूदगी से बढ़ सकता तनाव
जानकारों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता आगे बढ़ता है, लेकिन इजराइल उसका हिस्सा नहीं बनता, तो क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां बनी रह सकती हैं. खासकर गाजा, दक्षिणी लेबनान और सीरिया में इजराइली सैन्य मौजूदगी भविष्य में नए तनाव का कारण बन सकती है.
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें 19 जून को प्रस्तावित जेनेवा वार्ता पर टिकी हैं, जहां अमेरिका और ईरान के रिश्तों में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है. वहीं इजराइल का सख्त रुख इस संभावित शांति प्रक्रिया के सामने नई चुनौती खड़ी करता नजर आ रहा है.



