नई दिल्ली। ईरान ने अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार और दफन से जुड़े राजकीय एवं धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं को औपचारिक निमंत्रण भेजा है। आमंत्रित नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा शामिल हैं। इस घटनाक्रम ने भारत और ईरान के कूटनीतिक संबंधों के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है।
जानकारी के अनुसार, ईरान की ओर से विभिन्न देशों के राजनीतिक, राजनयिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों को अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। इसी क्रम में भारत के प्रमुख राजनीतिक नेताओं को भी निमंत्रण भेजा गया है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है कि पार्टी के नेता इस कार्यक्रम में शामिल होंगे या नहीं। बताया जा रहा है कि ईरान ने भारत सरकार को भी इस राजकीय समारोह की जानकारी देते हुए उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व का आग्रह किया है।
ऐसे आयोजनों को केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं माना जाता, बल्कि इन्हें देशों के बीच आपसी सम्मान, कूटनीतिक संवाद और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में भी देखा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से ऊर्जा, व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा और संपर्क परियोजनाओं सहित कई क्षेत्रों में सहयोग रहा है। ऐसे में इस तरह का निमंत्रण दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों की निरंतरता का संकेत भी माना जा रहा है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी विदेशी राजकीय समारोह में भारतीय नेताओं की भागीदारी केवल राजनीतिक महत्व नहीं रखती, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की उपस्थिति और कूटनीतिक संतुलन को भी दर्शाती है।
फिलहाल सभी की निगाहें कांग्रेस नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं। यदि पार्टी के वरिष्ठ नेता इस समारोह में शामिल होते हैं तो इसे भारत और ईरान के बीच स्थापित संवाद की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। दूसरी ओर, यदि किसी कारणवश वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाते हैं, तो भी दोनों देशों के आधिकारिक संबंधों पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं मानी जा रही है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतिम संस्कार समारोह में भारत की ओर से किस स्तर का प्रतिनिधित्व होता है और इस संबंध में कांग्रेस तथा भारत सरकार की ओर से आगे क्या आधिकारिक निर्णय सामने आता है।



