Thursday, November 5, 2026
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जिसको समझा भिखारी, वो निकला करोड़ों की संपत्ति का मालिक, कमाई जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

Indore Rich Beggar: इंदौर में भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के दौरान प्रशासन उस वक्त हैरान रह गया, जब कुष्ठ रोग से जूझ रहे एक 50 वर्षीय भिखारी के पास करोड़ों की संपत्ति होने का खुलासा हुआ।

Indore Rich Beggar: इंदौर में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां सराफा मार्केट में भीख मांगने वाला मांगीलाल करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला. दरअसल प्रशासन ने भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के दौरान कुष्ठ रोग से जूझ रहे 50 वर्षीय भिखारी को बचाया है और शुरुआती तौर पर पता चला है कि वह 3 मकानों, एक कार और 3 ऑटो रिक्शा समेत लाखों रुपये की संपत्ति का मालिक है. अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। प्रशासन ने इंदौर में भीख लेने के साथ ही भीख देने और भिखारियों से कोई सामान खरीदने तक पर कानूनी रोक लगा रखी है और उसका दावा है कि शहर ‘भिक्षुकमुक्त’ है.

नोडल अधिकारी ने किया चौंकाने वाला खुलासा

महिला और बाल विकास विभाग के अधिकारी दिनेश मिश्रा ने बताया कि आम लोगों की सूचना पर सर्राफा क्षेत्र से एक कुष्ठ रोगी को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराने के लिए बचाया गया है. मिश्रा, भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के नोडल अधिकारी हैं. उन्होंने बताया, ‘हमें पता चला है कि इस व्यक्ति के पास 3 पक्के मकान हैं. इनमें तीन मंजिलों वाला एक भवन शामिल है. इसके अलावा, उसके पास तीन ऑटो रिक्शा हैं जिन्हें उसने किराये पर दे रखा है.’

कार में बैठकर जाता है भीख मांगने

मिश्रा के मुताबिक, इस व्यक्ति के पास एक कार भी है जिसमें बैठकर वह भीख मांगने जाता है और इसके लिए उसने चालक रखा हुआ है. उन्होंने बताया, ‘कुष्ठ रोग से जूझ रहा यह व्यक्ति पहियों के सहारे घिसटने वाली गाड़ी पर बैठकर भीख मांगता है. यह व्यक्ति वर्ष 2021-22 से भिक्षावृत्ति कर रहा है और यह भी पता चला है कि उसने सर्राफा क्षेत्र में लोगों को 4 से 5 लाख रुपये उधार दिए हैं जिनसे वह दैनिक ब्याज वसूलता है. इस ब्याज से वह हर दिन 1,000 से 2,000 रुपये कमाता है. इसके अलावा, उसे रोजाना 400 रुपये से 500 रुपये भीख के तौर पर मिल जाते हैं.’ इस व्यक्ति को एक आश्रय गृह में रखा गया है.

‘उचित कानूनी प्रावधानों के अनुसार कदम उठाएंगे’

जिलाधिकारी शिवम वर्मा ने कहा कि इंदौर ‘भिक्षुकमुक्त शहर’ है और भिक्षावृत्ति की सूचना मिलने पर अभियान चलाकर भिखारियों का पुनर्वास किया जाता है. उन्होंने कहा कि सर्राफा क्षेत्र में भिक्षावृत्ति से बचाए गए व्यक्ति की संपत्तियों के बारे में प्रशासन को शुरुआती जानकारी मिली है और तथ्यों की जांच के बाद उचित कानूनी प्रावधानों के अनुसार कदम उठाए जाएंगे.

पहले मिस्त्री के तौर पर काम करता था शख्स

भिक्षावृत्ति उन्मूलन के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठन ‘प्रवेश’ की अध्यक्ष रूपाली जैन ने कहा कि कुष्ठ रोग से जूझ रहे इस व्यक्ति के मामले को मानवीय नजरिये से देखा जाना चाहिए क्योंकि उसने लाखों रुपये की कथित संपत्ति भीख मांगकर नहीं बनाई है. उन्होंने बताया कि यह व्यक्ति कुछ साल पहले मकान बनाने वाले मिस्त्री के तौर पर काम करता था, लेकिन कुष्ठ रोग के कारण उंगलियों और पैरों को गंभीर नुकसान के बाद वह यह काम जारी नहीं रख सका और सामाजिक व पारिवारिक भेद-भाव का शिकार होने के बाद उसने सर्राफा क्षेत्र की मशहूर चाट-चौपाटी के पास रात के वक्त भीख मांगनी शुरू कर दी. उन्होंने ने बताया, ‘हमने पिछले 4 साल के दौरान 2 बार इस व्यक्ति को समझाया कि वह भीख मांगना छोड़ दे. उसने कुछ वक्त के लिए भीख मांगना छोड़ भी दिया था, लेकिन बाद में उसने फिर से भिक्षावृत्ति शुरू कर दी.’

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