Friday, May 22, 2026
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भारत की कूटनीति की 2025 में हुई कठिन परीक्षा, जानिए ऑपरेशन सिंदूर की ललकार से चीन की दोस्ती तक

2025 भारत की कूटनीति के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। पाकिस्तान के साथ सैन्य टकराव, पहलगाम आतंकी हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’, सिंधु जल संधि का निलंबन और संघर्ष विराम पर ट्रंप के दावों ने भू-राजनीतिक दबाव बढ़ाया। अमेरिका के साथ शुल्क, वीजा नीति और पाकिस्तान से उसकी नजदीकी के कारण रिश्तों में तनाव आया।

नई दिल्ली। भारत की कूटनीति के लिए 2025 कई मायनों में बड़ी परीक्षा का वर्ष रहा। उसे पाकिस्तान के साथ पिछले कई दशकों के सबसे भीषण सैन्य टकराव के भू-राजनीतिक असर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्क और बांग्लादेश के साथ लगातार बिगड़ते रिश्तों संबंधी मामलों से निपटना पड़ा। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल में हुए भीषण आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत से वैश्विक स्तर पर आक्रोश भड़का और भारत ने पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए दुनियाभर के देशों को दिखाया कि उसे जवाब देने का अधिकार है।

पाकिस्तान पर ऑपरेशन सिंदूर का कहर

आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक कदमों की घोषणा की जिनमें 65 वर्ष पुरानी सिंधु जल संधि का निलंबन भी शामिल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, ‘‘पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।’’ आतंकवादी हमले के ठीक दो सप्ताह बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया और सात मई को पाकिस्तान एवं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमले किए जिनमें कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए। इन हमलों के बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की, हालांकि भारतीय सेना ने इनमें से अधिकतर हमलों को विफल कर दिया।

हालात तेजी से बिगड़ने पर दोनों परमाणु हथियार संपन्न देशों के बीच पूर्ण पैमाने पर युद्ध की आशंका पैदा हो गई और दुनिया के कई देशों ने उनसे संयम बरतने की अपील की तथा सैन्य टकराव रुकवाने के लिए नयी दिल्ली एवं इस्लामाबाद से संपर्क किया। भारत एवं पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच ‘हॉटलाइन’ पर बातचीत के बाद सैन्य टकराव रोकने पर 10 मई को सहमति बनी लेकिन सबसे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर संघर्ष विराम की घोषणा कर दी जिससे भारत की विदेश नीति के विशेषज्ञों के लिए नयी चुनौती खड़ी हो गई। इसके बाद के महीनों में ट्रंप ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा कि भारत एवं पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष उन्होंने रुकवाया और लाखों जानें बचाईं जबकि नयी दिल्ली ने लगातार कहा कि भारत एवं पाकिस्तान के बीच हुई बातचीत के बाद सैन्य टकराव रोके जाने पर सहमति बनी थी और अमेरिका की इसमें कोई भूमिका नहीं थी। भारत के इस रुख ने ट्रंप प्रशासन को नाखुश कर दिया।

भारत और अमेरिका के संबंधों में तनाव

भारत एवं अमेरिका के संबंधों में तनाव के बीच ट्रंप ने 18 जून को ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के लिए बंद कमरे में दोपहर भोज आयोजित किया जिसने अमेरिका एवं पाकिस्तान के रिश्तों को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला। ट्रंप ने एक अक्टूबर को मुनीर से दूसरी बार मुलाकात की। भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत खिंचने के बीच ट्रंप ने अगस्त में भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया जिसमें रूसी कच्चा तेल खरीदने पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है। अमेरिका की नयी आव्रजन नीति और एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ाकर 1,00,000 अमेरिकी डॉलर करने के फैसले भी रिश्तों में गिरावट का कारण प्रतीत हुए।

दोनों नेताओं के बीच संबंधों में आई इस तेज गिरावट ने विदेश नीति के कई विशेषज्ञों को आश्चर्यचकित कर दिया क्योंकि राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप के पहले कार्यकाल में उनके और मोदी के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध दिखे थे। एक अन्य प्रमुख घटनाक्रम में पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रणनीतिक रक्षा समझौता किया जिसमें कहा गया कि ‘‘दोनों देशों में से किसी एक पर भी आक्रमण, दोनों पर हमला माना जाएगा।’’ भारत एवं बांग्लादेश के संबंधों में भी तनाव बढ़ा जिसका मुख्य कारण बांग्लादेश में हिंदुओं सहित अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाले चरमपंथी तत्वों की बढ़ती गतिविधियां रहीं। बांग्लादेश का पाकिस्तान और चीन के साथ बढ़ता संपर्क भी संबंधों में गिरावट का कारण बना। बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के अगस्त 2024 में भारत जाने के बाद संबंधों में गिरावट आनी शुरू हुई थी।

भारत-चीन के संबंधों में आए सुधार

हालांकि भारत-चीन संबंधों में 2025 में उल्लेखनीय सुधार हुआ और पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के दौरान आई गिरावट के बाद रिश्ते फिर से मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा, सीधी उड़ानों की बहाली और वीजा नियमों में ढील शामिल रही। मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने द्विपक्षीय संबंध गहरे करने और सीमा मुद्दे का ‘‘उचित’’ समाधान खोजने पर अगस्त में सहमति जताई।

शंघाई सहयोग शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के तियानजिन में हुई एक बैठक में मोदी और शी ने वैश्विक वाणिज्य को स्थिर करने के लिए व्यापार और निवेश संबंधों का विस्तार करने का भी संकल्प लिया। रूस के साथ भी ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में संबंध मजबूत हुए। वर्ष के अंत में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत यात्रा की और भारत एवं रूस के बीच व्यापार साझेदारी मजबूत करने के लिए पांच साल की योजना पर सहमति बनी। भारत और ब्रिटेन ने जुलाई में ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता किया। भारत और कनाडा ने भी 2023 के विवाद के बाद रिश्ते सुधारने के प्रयास किए। हिंद-प्रशांत से जुड़े सरोकार और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए खाड़ी क्षेत्र के साथ सहयोग विस्तार भी वर्ष की कूटनीति के प्रमुख केंद्र रहे।

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Mukesh Kumar
Mukesh Kumarhttps://jagoindiajago.news/
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