नई दिल्ली(प्रज्ञा पांडे)। भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोना अब सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की सबसे बड़ी घरेलू संपत्तियों में से एक बन चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय घरों में जमा सोने की कुल वैल्यू करीब 5 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग 450 लाख करोड़ रुपए के स्तर तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा भारत की कुल GDP के बराबर या उससे भी अधिक बताया जा रहा है। सोने की बढ़ती कीमतों ने घरों में रखे इस पारंपरिक निवेश की वैल्यू को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय परिवारों के पास करीब 34,600 टन सोना मौजूद है। भारत में सोने को लंबे समय से सुरक्षित निवेश और पारिवारिक संपत्ति के रूप में देखा जाता है। शादी-ब्याह, त्योहारों और निवेश के लिए सोने की मांग लगातार बनी रहती है, जिसका असर इसकी कीमतों पर भी दिखाई देता है।
इसी बीच सोने और चांदी के बाजार में भी तेजी देखने को मिली है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, चांदी की कीमत में 3,493 रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद चांदी का भाव 2,18,967 रुपए प्रति किलो पहुंच गया। इससे पहले चांदी 2,15,474 रुपए प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी। वहीं, 24 कैरेट सोने की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। सोना 756 रुपए महंगा होकर 1,41,915 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले 17 जुलाई को 24 कैरेट सोने का भाव 1,41,159 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
अगर साल 2026 की बात करें तो सोने की कीमतों में अब तक करीब 9 हजार रुपए की तेजी देखने को मिली है। दिसंबर 2025 के अंत में 10 ग्राम सोना करीब 1.33 लाख रुपए के आसपास था, जो अब बढ़कर लगभग 1.42 लाख रुपए के स्तर पर पहुंच चुका है। दूसरी ओर, चांदी की कीमतों में इस अवधि में गिरावट दर्ज की गई है। दिसंबर 2025 में करीब 2.30 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर रही चांदी अब लगभग 2.19 लाख रुपए प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही है। सोने की कीमतें हर शहर में अलग-अलग हो सकती हैं। इसके पीछे कई स्थानीय और बाजार से जुड़े कारण होते हैं। एक शहर से दूसरे शहर सोना पहुंचाने में लगने वाला ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी खर्च कीमत को प्रभावित करता है। इसके अलावा स्थानीय मांग और सप्लाई, ज्वेलर्स की खरीद कीमत और शहर के स्थानीय बुलियन बाजार के रेट भी अंतिम कीमत तय करने में भूमिका निभाते हैं।
भारत में दक्षिणी राज्यों में सोने की खपत काफी ज्यादा है, जिसके कारण वहां बाजार की मांग कीमतों को प्रभावित कर सकती है। वहीं, पुराने स्टॉक और ज्वेलर्स ने किस कीमत पर सोना खरीदा है, इसका असर ग्राहकों को मिलने वाले अंतिम भाव पर भी पड़ता है। अगर आप सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं तो हमेशा BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है। खरीदारी से पहले सोने का वजन, मेकिंग चार्ज और उस दिन के बाजार भाव की तुलना जरूर करें, क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतें अलग-अलग होती हैं। रिकॉर्ड स्तर के आसपास पहुंची कीमतों के बीच सोना और चांदी दोनों ही निवेशकों और आम ग्राहकों के लिए चर्चा का विषय बने हुए हैं। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों और घरेलू मांग जैसे कारक इनकी कीमतों की दिशा तय कर सकते हैं।



