नई दिल्ली। नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बीच भारत ने राहत अभियान तेज कर दिया है। 26 अगस्त से अब तक भारतीय वायुसेना के चार सैन्य विमान नेपाल पहुंच चुके हैं, जिनके जरिए करीब 68.5 टन आपात राहत सामग्री भेजी गई है। इस सहायता में अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट, सौर लैंप, दवाएं, भोजन और बचाव उपकरण शामिल हैं।
पहली खेप 26 अगस्त को सी-130जे हरक्यूलिस विमान से भेजी गई थी। इसमें करीब 10 टन राहत सामग्री थी। अगले दिन सी-17 ग्लोबमास्टर के जरिए 37.5 टन सामान भेजा गया, जिसमें टेंट, कंबल, स्वच्छता किट, जल निकासी पंप, रसोई उपकरण, जनरेटर, दवाएं और खाद्य सामग्री शामिल थी।
28 अगस्त को एक अन्य सी-130जे विमान से भारतीय सेना की सुरंग बचाव टीम और चिकित्सा दल को नेपाल भेजा गया। इसी उड़ान के साथ जनरेटर, भोजन, पानी शुद्ध करने वाली गोलियां और दवाएं भी पहुंचाई गईं। चौथी उड़ान से 11 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंची। इसमें खोज एवं बचाव के लिए तकनीकी दल और उपकरण, डीएनए जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञ तथा कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल और स्वच्छता सामग्री शामिल हैं।
भारत ने राहत सामग्री के अलावा 230 फुट लंबे एकल लेन वाले मॉड्यूलर स्टील पुल के निर्माण के लिए जरूरी उपकरणों से लदे 16 ट्रक भी नेपाल भेजे हैं। यह सहायता बाढ़ से क्षतिग्रस्त संपर्क व्यवस्था को बहाल करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
कई देशों ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की मदद के लिए चीन ने राहत सामग्री और आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। चीनी सेना के दो परिवहन विमान 50 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचे। इसमें टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, प्राथमिक उपचार सामग्री और खाद्य पदार्थ शामिल हैं। ब्रिटेन ने करीब 50 लाख पाउंड और ऑस्ट्रेलिया ने 50 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की सहायता घोषित की है। संयुक्त अरब अमीरात ने एक करोड़ डॉलर और कनाडा ने 50 लाख कनाडाई डॉलर की मदद का ऐलान किया है।
अमेरिका ने भी शुरुआती तौर पर पांच लाख डॉलर की सहायता दी थी और बाद में 36 लाख डॉलर से अधिक की मानवीय मदद की घोषणा की। दक्षिण कोरिया और श्रीलंका ने 10-10 लाख डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी सक्रिय
विश्व बैंक ने नेपाल में राहत और पुनर्निर्माण के लिए करीब 25 अरब रुपये तक की आपात सहायता जुटाने की संभावना जताई है। यूरोपीय संघ ने 20 लाख यूरो और संयुक्त राष्ट्र ने 25 लाख डॉलर की आपात राशि जारी की है। रेड क्रॉस ने भी प्रारंभिक सहायता के साथ बड़े राहत अभियान के लिए अतिरिक्त धन जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और मेडेसिन सैंस फ्रोंतिएर जैसी संस्थाएं चिकित्सा सामग्री और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं।
26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने या बर्फ-पत्थरों के बड़े मलबे के खिसकने के बाद अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई गई है। पानी और मलबे के तेज बहाव ने गांवों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचाया।
रविवार सुबह तक नेपाल और तिब्बत में मृतकों की संयुक्त संख्या 750 तक पहुंच गई थी, जबकि 3,000 से अधिक लोग लापता बताए गए। नेपाल में 734 मौतें और 2,498 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई, जबकि चीन के अनुसार तिब्बत में 16 लोगों की मौत और 546 लोग लापता हैं।



