काठमांडू। नेपाल में हाल की भीषण बाढ़ ने तबाही के साथ एक गंभीर मानवीय संकट भी खड़ा कर दिया है। चितवन घाटी के देवघाट इलाके में जहां कभी लोग सुबह घूमने आते थे, अब वहां अज्ञात शवों को दफनाया जा रहा है। शनिवार को 96 शवों को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के तहत जंगल में दफन किया गया। प्रशासन रविवार को 100 से अधिक अन्य शवों को दफनाने की तैयारी में था।
स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, बड़ी संख्या में शव कई दिनों से अस्पतालों में रखे थे और गर्म मौसम के कारण उनके खराब होने की स्थिति गंभीर होती जा रही थी। संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी खतरे को देखते हुए शवों को सुरक्षित तरीके से दफनाने का फैसला किया गया। प्रशासन ने प्रत्येक कब्र को अलग नंबर दिया है। पहचान के लिए कब्रों पर निशान लगाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में डीएनए जांच के जरिए किसी शव की पहचान होने पर उसे परिवार को सौंपा जा सके।
परिजनों की लंबी कतार
चितवन एक्सपो सेंटर के बाहर बड़ी संख्या में लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में पहुंच रहे हैं। कई लोग दूसरे इलाकों से घंटों की यात्रा कर यहां आए हैं और शवों की पहचान का इंतजार कर रहे हैं। शवों की तस्वीरें उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन सभी परिवारों को तत्काल अंदर जाने का अवसर नहीं मिल पाया है।
एक पुरानी इमारत में भी बड़ी संख्या में शव रखे गए हैं। शवों को बॉडी बैग में रखकर ठंडा रखने के लिए ड्राई आइस और कूलर का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद दुर्गंध की स्थिति बेहद खराब है। वहां तैनात पुलिसकर्मियों को लोगों के लिए मास्क उपलब्ध कराने पड़ रहे हैं।
अस्पतालों पर भी बढ़ा दबाव
भारतपुर अस्पताल में भी हालात चिंताजनक बताए जा रहे हैं। अस्पताल की निर्धारित मोर्चरी क्षमता करीब 50 शवों की है, जबकि वहां लगभग 125 शव रखे होने की जानकारी है। कई शवों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि चेहरे से पहचान करना मुश्किल हो गया है। लंबे समय तक पानी में रहने के कारण शवों के खराब होने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
अस्पताल और राहतकर्मी लगातार शवों की पहचान और सुरक्षित निपटारे में जुटे हैं। प्रशासन डीएनए नमूने एकत्र कर रहा है, ताकि लापता लोगों के परिवारों को उनके परिजनों की पहचान में मदद मिल सके। भारत ने भी फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भेजी है, जबकि चीन के साथ भी राहत और पहचान प्रक्रिया को लेकर समन्वय किया जा रहा है।
सैकड़ों की मौत, हजारों लापता
ग्लेशियर टूटने के बाद बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने चीन सीमा से लगे घाटी क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई। पानी, मलबे और तेज बहाव के कारण बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 750 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,000 से अधिक लोग अभी लापता बताए जा रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। रविवार सुबह भी एक वाहन से 13 शव लाए गए, जबकि छह एंबुलेंस अस्पताल के बाहर खड़ी रहीं। राहत अभियान के साथ अब प्रशासन के सामने मृतकों की पहचान और उनके परिजनों तक शव पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।



