(प्रज्ञा पांडे)। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर हालात गर्म हो गए हैं। इस बार निशाने पर दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको से जुड़े अहम ऊर्जा ठिकाने बताए जा रहे हैं। यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के जिजान इंडस्ट्रियल एरिया और यनबू क्षेत्र पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। इन हमलों के बाद पूरे इलाके में अलर्ट बढ़ा दिया गया है। अगर आपने पिछले कुछ सालों में मिडिल ईस्ट की खबरें देखी हैं, तो आप जानते होंगे कि जब भी अरामको का नाम किसी हमले के साथ जुड़ता है, पूरी दुनिया की नजरें सऊदी अरब पर टिक जाती हैं। इसकी वजह भी साफ है अरामको सिर्फ एक कंपनी नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादन नेटवर्क की रीढ़ मानी जाती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का हमला सिर्फ सऊदी अरब का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार का मामला बन जाता है। हूती विद्रोहियों का दावा है कि उन्होंने लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया। उनके मुताबिक यह हमला हाल के दिनों में यमन पर हुए सैन्य हमलों के जवाब में किया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
दूसरी तरफ, सऊदी अरब का कहना है कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक बड़े पैमाने पर उत्पादन रुकने या किसी बड़े विस्फोट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यही वजह है कि हमले के वास्तविक असर को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है।
जिजान और यनबू इतने अहम क्यों हैं?
जिजान और यनबू सऊदी अरब के उन रणनीतिक इलाकों में शामिल हैं जहां तेल, पेट्रोकेमिकल और ऊर्जा से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट मौजूद हैं। खासकर यनबू, रेड सी के किनारे स्थित एक बड़ा औद्योगिक और एक्सपोर्ट हब है, जहां से तेल और पेट्रोलियम उत्पाद दुनिया के कई देशों तक पहुंचते हैं। अगर इन इलाकों में बड़े स्तर पर नुकसान होता है, तो उसका असर सिर्फ सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहता।
क्या तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं?
इतिहास बताता है कि जब भी सऊदी अरब के तेल ढांचे पर हमले होते हैं, अंतरराष्ट्रीय बाजार तुरंत प्रतिक्रिया देता है। निवेशकों को सप्लाई बाधित होने का डर सताने लगता है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि इस बार कीमतों पर कितना असर पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हमले से वास्तविक नुकसान कितना हुआ है और आने वाले दिनों में तनाव कितना बढ़ता है।
मिडिल ईस्ट में क्यों बढ़ रहा है तनाव?
यमन में लंबे समय से गृहयुद्ध चल रहा है। हूती विद्रोही और सऊदी समर्थित गठबंधन के बीच संघर्ष कई वर्षों से जारी है। हाल के महीनों में क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा है, जिसके चलते मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं भी तेज हुई हैं। यही वजह है कि हर नए हमले के बाद पूरी दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट पर टिक जाती है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह हमला सिर्फ एक चेतावनी था या आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज होगा? अगर जवाबी कार्रवाई होती है, तो इसका असर केवल सऊदी अरब और यमन तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग रूट और पूरी क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।



