मुंबई। देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी बैंक ने अपने नए चेयरमैन के तौर पर पूर्व वित्त सचिव और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। हालांकि, उनकी नियुक्ति प्रभावी होने से पहले भारतीय रिजर्व बैंक और बैंक के शेयरधारकों की मंजूरी मिलना बाकी है।
बैंक के निदेशक मंडल ने राजीव कुमार को चार वर्षों के लिए अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशक नियुक्त करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही उन्हें तीन साल के कार्यकाल के लिए पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त करने की भी स्वीकृति दी गई है। उनका कार्यकाल आरबीआई की मंजूरी मिलने के बाद शुरू होगा। राजीव कुमार भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और वित्तीय क्षेत्र में लंबे अनुभव के लिए जाने जाते हैं। वित्त सचिव के रूप में उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सुधार, एनपीए संकट से निपटने, बैंक पुनर्पूंजीकरण और वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
बाद में उन्होंने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब एचडीएफसी बैंक पिछले कुछ महीनों से नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा था। पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बैंक में अंतरिम व्यवस्था लागू की गई थी और स्थायी चेयरमैन की तलाश जारी थी। अब राजीव कुमार की नियुक्ति से बैंक के शीर्ष नेतृत्व में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है। बैंक का मानना है कि राजीव कुमार का प्रशासनिक अनुभव और वित्तीय क्षेत्र की गहरी समझ भविष्य की रणनीतियों को मजबूती देने में मदद करेगी।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब बैंक डिजिटल विस्तार, बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस और दीर्घकालिक विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अनुभवी नेतृत्व मिलने से निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है। अब सभी की नजर RBI की अंतिम मंजूरी पर है, जिसके बाद राजीव कुमार आधिकारिक तौर पर एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन का कार्यभार संभालेंगे।



