जयपुर। Hanuman Beniwal Controversy: राजस्थान की राजनीति में इस वक्त ज़बरदस्त भूचाल आया हुआ है। नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल और सूबे की भजनलाल शर्मा सरकार के बीच का टकराव अब एक खुली और आर-पार की जंग में तब्दील हो चुका है। भैराणा धाम की महापंचायत में संतों के मंच से मुख्यमंत्री पर की गई एक टिप्पणी के बाद से शुरू हुआ यह विवाद अब सुरक्षा में कटौती, पुलिस अधिकारियों के निलंबन और 5 महीने पुराने मामले में दर्ज हुई एफआईआर (FIR) तक पहुंच गया है। राजनीतिक गलियारों में हर कोई हैरान है कि घटनाक्रम इतनी तेजी से बदल रहे हैं कि अब भजनलाल सरकार खुद चौतरफा विवादों में घिरती नजर आ रही है।
मदन राठौड़ विवाद: अधिकारियों पर गिरी गाज, कुचामन SHO सस्पेंड
पूरा विवाद तब और गहरा गया जब भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ कुचामन पहुंचे और आरएलपी कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर उनका उग्र विरोध किया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, लेकिन जब उन्हें तहसीलदार कैलाश ईनाणिया की अदालत से जमानत मिल गई, तो प्रशासन ने ताबड़तोड़ एक्शन शुरू कर दिए:
पहला एक्शन: कार्यकर्ताओं को जमानत देने वाले तहसीलदार कैलाश ईनाणिया का आधी रात को ही बांसवाड़ा तबादला कर दिया गया।
दूसरा एक्शन: डीडवाना-कुचामन के एसपी ज्ञानचंद्र यादव को हटाकर जयपुर मुख्यालय बुला लिया गया, जिन्होंने महज 10 दिन पहले ही कार्यभार संभाला था।
तीसरा एक्शन: मदन राठौड़ की सुरक्षा में कथित चूक को आधार बनाकर कुचामन सिटी के थानाधिकारी (SHO) सतपाल सिंह सांगवा को सस्पेंड कर दिया गया।
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थानेदार के निलंबन पर भड़की जनता, सड़कों पर उतरा सर्व समाज
प्रशासन का यह दांव कुचामन में उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। लोकप्रिय थानाधिकारी सतपाल सिंह सांगवा के निलंबन की खबर आते ही स्थानीय जनता का गुस्सा फूट पड़ा। सर्व समाज ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और कुचामन की सड़कों पर एक विशाल पैदल रैली निकाली।
सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने उपखंड अधिकारी (SDM) विश्वामित्र मीणा को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम एक ज्ञापन सौंपकर SHO का निलंबन तुरंत रद्द करने की मांग उठाई है। हालांकि निलंबन आदेश में विभागीय जांच को आधार बताया गया है, लेकिन जनता इसे पूरी तरह से राजनीतिक द्वेष के तहत की गई कार्रवाई मान रही है।
अब 5 महीने पुराने मामले में बेनीवाल सहित 14 नेताओं पर FIR दर्ज
प्रशासनिक फेरबदल और सस्पेंशन के बीच हनुमान बेनीवाल की मुश्किलें बढ़ाने के लिए पुलिस ने एक और बड़ा दांव खेला है। नागौर जिले के रियांबड़ी क्षेत्र में इसी साल 13 जनवरी को बजरी खनन माफिया के खिलाफ हुए एक आंदोलन को लेकर अब पादूंकला थाना पुलिस ने 28 मई को नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज की है।
क्या हैं FIR में आरोप?
पुलिस का आरोप है कि क्षेत्र में धारा 144 लागू होने के बावजूद जनसभा आयोजित की गई और लोगों को जयपुर कूच के लिए उकसाया गया। लगभग 150 वाहनों के काफिले के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-58) को बाधित किया गया, जिससे 28 किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब 4 घंटे लगे और हाईवे प्रभावित रहा।
इस एफआईआर में हनुमान बेनीवाल के अलावा पूर्व विधायक दिलीप चौधरी, पूर्व विधायक इंदिरा देवी बावरी सहित 14 नेताओं को नामजद किया गया है, जबकि 200 से 250 अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। मामले की जांच एएसआई सीताराम को सौंपी गई है।
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सुरक्षा घटी, पर तेवर बरकरार: बेनीवाल ने फिर दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
इस पूरी कानूनी और प्रशासनिक घेराबंदी के बावजूद हनुमान बेनीवाल पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। जयपुर के एसएमएस (SMS) अस्पताल पहुंचकर उन्होंने अजीतपुरा कलां में हुई गोलीबारी की घटना के घायलों से मुलाकात की और लाइमस्टोन माइंस विवाद को लेकर फिर से एक बड़े आंदोलन की चेतावनी दे डाली।
साथ ही, बेनीवाल ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “राजस्थान में असली विपक्ष केवल आरएलपी (RLP) है, जबकि कांग्रेस सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन करने में नाकाम रही है।” इसके अलावा उन्होंने रामगढ़ बांध क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए भी बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
क्या वागड़ की तर्ज पर नागौर में भी घिर गई सरकार?
एक तरफ मुख्यमंत्री पर बयान के बाद बेनीवाल के पास से एके-47 से लैस 3 कमांडोज (PSO) हटाए गए, कार्यकर्ताओं पर केस हुए, अधिकारियों को सस्पेंड किया गया, तो दूसरी तरफ जनता अब अधिकारियों के समर्थन में सड़कों पर आ गई है। ऐसे में भजनलाल सरकार को अब फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा, क्योंकि जनभावनाएं भड़कने पर विवाद और गहरा सकता है।



