कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कोलकाता के महापौर फिरहाद हकीम ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया भाजपा के लिए उल्टा असर डाल सकती है और चुनावी नतीजों में पार्टी को नुकसान झेलना पड़ सकता है।
चुनाव प्रचार के दौरान बातचीत में हकीम ने दावा किया कि राज्य की जनता अब भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि भले ही भाजपा ने इस बार ज्यादा आक्रामक प्रचार अभियान चलाया हो और उसके शीर्ष नेता लगातार राज्य का दौरा कर रहे हों, लेकिन जमीन पर स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। उनके अनुसार, भाजपा को स्थानीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व की कमी के कारण राष्ट्रीय नेताओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
हकीम ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया ने मतदाताओं में नाराजगी पैदा की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार के कुछ सदस्यों के नाम सूची से हट जाते हैं, तो इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है और यह असंतोष भाजपा के खिलाफ जा सकता है। उनके मुताबिक, जिन लोगों को मतदान का अधिकार होते हुए भी वोट नहीं डालने का अवसर नहीं मिलेगा, वे इस मुद्दे को याद रखेंगे और इसका प्रभाव चुनाव परिणामों पर दिख सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों का असर किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी वर्गों के लोग इससे प्रभावित हुए हैं। हकीम के अनुसार, तकनीकी त्रुटियों के कारण नाम हटने की घटनाएं हुई हैं, जिससे व्यापक असंतोष पैदा हुआ है।
इसके अलावा, उन्होंने भाजपा पर यह आरोप भी लगाया कि पार्टी चुनावों में सीधे विपक्ष से लड़ने के बजाय आम लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करती है। उन्होंने पिछले चुनावों में उठे मुद्दों का हवाला देते हुए कहा कि इस बार मतदाता सूची का मामला भी उसी तरह से उठाया गया है।
भाजपा के शीर्ष नेताओं के लगातार दौरे पर टिप्पणी करते हुए हकीम ने कहा कि यह राज्य में पार्टी के भरोसेमंद नेतृत्व की कमी को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि तृणमूल कांग्रेस इस बार भी मजबूत प्रदर्शन करेगी और बड़ी जीत दर्ज करेगी। उनके अनुसार, पार्टी 200 से अधिक सीटें हासिल कर सकती है और यह आंकड़ा इससे भी आगे जा सकता है।



