Wednesday, July 1, 2026
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WhatsApp के यूजरनेम फीचर की जांच करेगी सरकार, फर्जी अकाउंट और साइबर फ्रॉड का खतरा

WhatsApp के नए Username फीचर की जांच केंद्र सरकार करेगी। सरकार को आशंका है कि मोबाइल नंबर छिपने के बाद फर्जी अकाउंट और साइबर फ्रॉड के मामले बढ़ सकते हैं। नए फीचर में यूजर केवल यूजरनेम से चैट कर सकेंगे। WhatsApp ने Username Key जैसी सुरक्षा सुविधा भी पेश की है। जानिए इस अपडेट से क्या बदलेगा, सरकार क्यों सतर्क है और यूजर्स के लिए इसके क्या फायदे और जोखिम हैं।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार WhatsApp के नए Username Feature की जांच करेगी। सरकार का मानना है कि इस फीचर का गलत इस्तेमाल कर साइबर अपराधी फर्जी पहचान बनाकर लोगों से धोखाधड़ी कर सकते हैं। इसी वजह से सरकार इस फीचर के सुरक्षा मानकों की बारीकी से समीक्षा करेगी।दरअसल, Meta अपने इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp पर ऐसा फीचर ला रही है, जिसमें यूजर्स मोबाइल नंबर साझा किए बिना केवल यूजरनेम के जरिए नए लोगों से चैट कर सकेंगे। कंपनी ने 29 जून से दुनिया भर में यूजरनेम बुकिंग शुरू कर दी है। हालांकि यह फीचर सभी यूजर्स को चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा।

सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि मोबाइल नंबर छिप जाने के बाद जालसाज किसी और के नाम से फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को आसानी से निशाना बना सकते हैं। भारत में WhatsApp के 50 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं, इसलिए सरकार इस फीचर के सुरक्षा पहलुओं का विस्तृत परीक्षण करना चाहती है।

यूजरनेम फीचर से क्या बदलेगा?

नया फीचर आने के बाद पहली बार किसी नए व्यक्ति से चैट करते समय आपका मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा। इसकी जगह केवल आपका यूजरनेम दिखाई देगा। हालांकि जिन लोगों के पास पहले से आपका नंबर सेव है या जिनसे पहले बातचीत हो चुकी है, उनके लिए पहले जैसा ही अनुभव रहेगा।WhatsApp इस फीचर के साथ Username Key भी ला रहा है। यह एक वैकल्पिक सिक्योरिटी पिन होगा। यदि यूजर इसे ऑन करता है, तो कोई भी व्यक्ति केवल यूजरनेम जानकर उसे मैसेज नहीं भेज पाएगा। पहली बार चैट शुरू करने से पहले उस सिक्योरिटी Key की जरूरत होगी, जिससे स्पैम और अनचाहे संदेशों को रोकने में मदद मिलेगी।

क्या हैं फायदे?

  • मोबाइल नंबर शेयर किए बिना नए लोगों से बातचीत।
  • पहले से बेहतर प्राइवेसी।
  • स्पैम और अनचाहे मैसेज में कमी।
  • क्रिएटर्स और बिजनेस के लिए एक जैसी डिजिटल पहचान बनाना आसान।

हालांकि सरकार का कहना है कि यूजर प्राइवेसी जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर रोक लगाना भी है। इसलिए फीचर के सभी सुरक्षा मानकों की जांच के बाद ही आगे की प्रक्रिया पर फैसला लिया जाएगा।

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