नई दिल्ली। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। अब तक इस रणनीतिक जलमार्ग पर मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान की सैन्य गतिविधियां देखने को मिलती थीं, लेकिन अब फ्रांस ने भी यहां अपना खास माइन काउंटरमेजर जहाज तैनात कर दिया है। यह कोई युद्धपोत या तेल-गैस ले जाने वाला जहाज नहीं, बल्कि समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (माइंस) का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने वाला विशेष पोत है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि फ्रांस का माइन स्वीपर जहाज अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित नौवहन बहाल करने और जहाजों की आवाजाही को सामान्य बनाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
क्यों भेजा गया माइन स्वीपर?
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद इस अहम समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही फिर से बढ़ने लगी है। ऐसे में किसी भी संभावित खतरे, खासकर समुद्री बारूदी सुरंगों से निपटने के लिए फ्रांस ने यह कदम उठाया है। माइन स्वीपर जहाज समुद्र में छिपी विस्फोटक माइंस का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करता है, जिससे व्यापारिक और सैन्य जहाज सुरक्षित तरीके से गुजर सकें।
ईरान ने जताया विरोध
फ्रांस की इस तैनाती को लेकर ईरान ने नाराजगी जाहिर की है। ईरान का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल खाड़ी क्षेत्र के देशों की होनी चाहिए। तेहरान चाहता है कि ओमान के साथ मिलकर वही इस जलमार्ग की सुरक्षा और प्रबंधन संभाले। ईरान पहले भी पश्चिमी देशों की अतिरिक्त सैन्य मौजूदगी का विरोध करता रहा है। इससे पहले जब फ्रांस ने जहाजों के लिए वैकल्पिक समुद्री मार्ग का सुझाव दिया था, तब भी ईरान ने कड़ा विरोध किया था और चेतावनी दी थी कि केवल उसके निर्धारित रूट का ही इस्तेमाल किया जाए।
दुनिया के लिए क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ता है। हाल के तनाव के दौरान इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे कई खाड़ी देशों के तेल निर्यात पर असर देखने को मिला। ऐसे में फ्रांस की नई तैनाती को समुद्री सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है, हालांकि ईरान के विरोध के चलते क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
क्या बढ़ सकता है तनाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रांस का यह कदम समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है, लेकिन यदि ईरान और पश्चिमी देशों के बीच मतभेद बढ़ते हैं तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन सकता है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस रणनीतिक जलमार्ग पर बनी हुई है।



