नई दिल्ली: काम का दबाव, लगातार भागदौड़ और कई चिंताएं कभी-कभी तनाव और बेचैनी बढ़ा देती हैं। ऐसे में मन को शांत करने के लिए बॉक्स ब्रीदिंग एक आसान तकनीक हो सकती है। इसे स्क्वायर ब्रीदिंग भी कहा जाता है। इसमें सांस लेने, रोकने और छोड़ने का एक निश्चित पैटर्न अपनाया जाता है।विशेषज्ञों के मुताबिक, नियंत्रित तरीके से सांस लेने का अभ्यास तनाव के दौरान शरीर की प्रतिक्रिया को शांत करने और ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है।
क्या है बॉक्स ब्रीदिंग?
बॉक्स ब्रीदिंग एक ब्रीदिंग एक्सरसाइज है, जिसमें चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण को आमतौर पर चार सेकेंड तक किया जाता है। इसके चारों चरण एक वर्ग की चार बराबर भुजाओं की तरह होते हैं।इस तकनीक में धीरे-धीरे सांस लेना, सांस रोकना, सांस छोड़ना और फिर सांस लेने से पहले रुकना शामिल है।
बॉक्स ब्रीदिंग करने के 4 आसान स्टेप्स
स्टेप 1: सांस अंदर लें
नाक से धीरे-धीरे चार सेकेंड तक सांस लें।
स्टेप 2: सांस रोकें
बिना जोर लगाए चार सेकेंड तक सांस रोके रखें।
स्टेप 3: सांस बाहर छोड़ें
धीरे-धीरे चार सेकेंड में सांस छोड़ें।
स्टेप 4: दोबारा रुकें
सांस लेने से पहले चार सेकेंड तक रुकें।
इन चारों चरणों को मिलाकर एक राउंड पूरा होता है। शुरुआत में तीन से चार राउंड करें। सहज महसूस होने पर धीरे-धीरे अभ्यास का समय बढ़ा सकते हैं। सांस रोकने में परेशानी हो तो समय कम रखें या सामान्य तरीके से सांस लें।
बॉक्स ब्रीदिंग करने के क्या फायदे हैं?
नियमित रूप से नियंत्रित सांस लेने का अभ्यास करने से कुछ लोगों को निम्नलिखित फायदे मिल सकते हैं:
- तनाव कम करने में मदद: धीमी और नियंत्रित सांसें मन को शांत करने में मदद कर सकती हैं।
- बेचैनी में राहत: तनावपूर्ण परिस्थिति में कुछ देर सांसों पर ध्यान देने से घबराहट कम महसूस हो सकती है।
- ध्यान केंद्रित करने में मदद: सांसों पर ध्यान देने से मन को वर्तमान पल पर केंद्रित करने में सहायता मिल सकती है।
- आराम महसूस होना: सोने से पहले इसका अभ्यास कुछ लोगों को मानसिक रूप से शांत होने में मदद कर सकता है।
ध्यान रखें कि बॉक्स ब्रीदिंग तनाव या एंग्जाइटी का निश्चित इलाज नहीं है। लगातार परेशानी होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
बॉक्स ब्रीदिंग करने का सही समय क्या है?
इस अभ्यास के लिए कोई एक तय समय जरूरी नहीं है। इसे अपनी सुविधा के अनुसार किया जा सकता है।
- काम के दबाव या तनाव के दौरान।
- किसी जरूरी मीटिंग या प्रेजेंटेशन से पहले।
- पढ़ाई करते समय ध्यान केंद्रित करने के लिए।
- सोने से पहले मन को शांत करने के लिए।
शुरुआत में तीन से पांच मिनट का अभ्यास पर्याप्त हो सकता है। अपनी सहजता के अनुसार समय तय करें।
बॉक्स ब्रीदिंग और सामान्य सांस लेने में क्या अंतर है?
सामान्य सांस लेने की प्रक्रिया अपने आप चलती रहती है। इसमें सांसों की अवधि या उनके बीच रुकने का समय तय नहीं किया जाता। वहीं, बॉक्स ब्रीदिंग में सांस लेने, रोकने, छोड़ने और दोबारा रुकने के लिए एक निश्चित समय का पैटर्न अपनाया जाता है।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
बॉक्स ब्रीदिंग आमतौर पर एक सरल अभ्यास है, लेकिन सांस रोकने से कुछ लोगों को असहजता हो सकती है। विशेष रूप से अस्थमा, हृदय संबंधी समस्या, पैनिक अटैक या सांस लेने से जुड़ी परेशानी वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।अभ्यास के दौरान चक्कर, घुटन या बेचैनी बढ़ने लगे तो तुरंत रुक जाएं और सामान्य रूप से सांस लें। सांस को जबरदस्ती न रोकें।
क्या बॉक्स ब्रीदिंग से तुरंत तनाव दूर हो जाता है?
कुछ लोगों को कुछ ही मिनटों में राहत महसूस हो सकती है, लेकिन इसका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहता है, रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है या बार-बार घबराहट होती है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।



