जयपुर। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने मंगलवार को युवा मतदाताओं को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने और मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए महाविद्यालय स्तर पर निर्वाचन साक्षरता गतिविधियों को विस्तार देने पर जोर दिया। उन्होंने शासन सचिवालय स्थित एनआईसी मीटिंग हॉल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के निर्वाचन साक्षरता क्लबों के अधिकारियों और महाविद्यालय प्राचार्यों के साथ संवाद किया।
बैठक में युवा मतदाताओं की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी, मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने और मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। इस दौरान एक राज्य-एक चुनाव, युवा मतदाता और निर्वाचन साक्षरता क्लबों की भूमिका को लेकर प्रस्तुतियां भी दी गईं।
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक मत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने युवाओं से मतदाता सूची में अपना नाम सुनिश्चित करने और सही जानकारी के आधार पर मतदान का निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को किसी भी प्रकार की अफवाह, प्रलोभन या दबाव से प्रभावित हुए बिना अपने मताधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही युवाओं से परिवार और आसपास के लोगों को भी मतदान के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
महाविद्यालयों में ईएलसी को बनाएं लोकतंत्र की प्रयोगशाला
राजेश्वर सिंह ने निर्वाचन साक्षरता क्लबों को महाविद्यालयों में लोकतांत्रिक शिक्षा का प्रभावी माध्यम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल मतदान की प्रक्रिया की जानकारी देने तक सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि मॉक पोल, भूमिका-अभिनय, प्रश्नोत्तरी और अन्य सहभागी कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ा जाए।
उन्होंने भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों के स्थान पर युवाओं को तथ्यपरक जानकारी उपलब्ध कराने तथा उनके सवालों और जिज्ञासाओं का संवाद के माध्यम से समाधान करने की आवश्यकता बताई।
रचनात्मक कार्यक्रमों से बढ़ेगी मतदान जागरूकता
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने महाविद्यालयों में निबंध, कविता पाठ, पोस्टर, रंगोली और स्लोगन प्रतियोगिताओं के साथ मतदाता जागरूकता रैलियां आयोजित करने के निर्देश दिए। स्वतंत्रता दिवस सहित अन्य अवसरों पर नुक्कड़ नाटक और मतदान गीत जैसी गतिविधियों के जरिए भी आमजन तक जागरूकता का संदेश पहुंचाने पर जोर दिया गया।
एक राज्य-एक चुनाव की भी दी जानकारी
राजेश्वर सिंह ने राजस्थान के पंचायती राज इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत राजस्थान से हुई थी। उन्होंने एक राज्य-एक चुनाव की अवधारणा को निर्वाचन प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उनके अनुसार, नगरीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव एक साथ होने से प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग, कार्यों में निरंतरता और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिल सकती है।
उन्होंने ईएलसी अधिकारियों और युवाओं से निर्वाचन साक्षरता से जुड़ी गतिविधियों के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने तथा राज्य निर्वाचन आयोग के आधिकारिक माध्यमों को टैग करने की अपील भी की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में विभिन्न जिलों के स्वीप नोडल अधिकारी, जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, महाविद्यालय प्राचार्य, ईएलसी अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में युवाओं को जागरूक मतदाता बनने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का संकल्प दिलाया गया।



