Thursday, July 16, 2026
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बीज वाले फल और सब्जियां खाने से होती है पथरी? जानिए इस दावे का पूरा सच!

क्या टमाटर, अमरूद या पपीते के बीज सच में शरीर में जमा होकर पथरी बना देते हैं? इस मिथक की सच्चाई जानना जरूरी है। जानिए कौन-सी चीजें वास्तव में किडनी स्टोन का खतरा बढ़ा सकती हैं और किन बीज वाले फल और सब्जियां खाते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

(प्रज्ञा पांडे)। कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या जिन फलों और सब्जियों में बीज होते है, उन्हें खाने से पेट या किडनी में पथरी बन सकती है? खासकर टमाटर, अमरूद, पपीता या दूसरी बीज वाली चीजों को लेकर अक्सर ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं कि इनके बीज शरीर में जमा होकर पथरी बना देते हैं। लेकिन वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो यह बात पूरी तरह सही नहीं है।

दरअसल, बीज वाले फलों और सब्जियों को खाने से सीधे तौर पर किडनी स्टोन बनने का कोई प्रमाण नहीं है। हमारा पाचन तंत्र ज्यादातर छोटे और मुलायम बीजों को आसानी से संभाल लेता है। कई बीजों के बाहरी हिस्से को शरीर पूरी तरह नहीं तोड़ पाता, इसलिए वे बिना पचे मल के रास्ते बाहर निकल जाते हैं। यानी ये बीज पेट या किडनी में जमा होकर पत्थर नहीं बनाते।

किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी तब बनती है, जब पेशाब में मौजूद कुछ खनिज और रासायनिक तत्व ज्यादा मात्रा में जमा होकर क्रिस्टल बनाने लगते हैं। सबसे आम प्रकार की पथरी कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन होती है। जब शरीर में ऑक्सालेट की मात्रा ज्यादा हो जाती है और यह कैल्शियम के साथ जुड़ता है, तो छोटे-छोटे क्रिस्टल बन सकते हैं, जो धीरे-धीरे पथरी का रूप ले सकते हैं। यही वजह है कि कुछ बीज वाली सब्जियों या खाद्य पदार्थों को लेकर भ्रम पैदा होता है। उदाहरण के लिए टमाटर के बीजों में ऑक्सालेट पाया जाता है, लेकिन सामान्य मात्रा में टमाटर खाना ज्यादातर स्वस्थ लोगों के लिए नुकसानदायक नहीं होता। समस्या उन लोगों में हो सकती है जिन्हें पहले से बार-बार किडनी स्टोन की शिकायत रहती है या जिनके शरीर में ऑक्सालेट का स्तर ज्यादा रहता है।

पालक, चुकंदर, बैंगन, और कुछ नट्स जैसे खाद्य पदार्थों में ऑक्सालेट की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हें खाने से हर व्यक्ति को पथरी हो जाएगी। पथरी बनने में सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि कई कारण मिलकर भूमिका निभाते हैं। इनमें शरीर में पानी की कमी, ज्यादा नमक का सेवन, खान-पान का असंतुलन, आनुवंशिक कारण और शरीर के मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।

किडनी स्टोन से बचाव में पानी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से पेशाब पतला रहता है और शरीर में मौजूद अतिरिक्त खनिज आसानी से बाहर निकल जाते हैं। कम पानी पीने पर पेशाब ज्यादा गाढ़ा हो सकता है, जिससे क्रिस्टल बनने की संभावना बढ़ सकती है।

एक और आम गलतफहमी यह है कि बीज खाने से वे पेट में जाकर चिपक जाते हैं या शरीर के अंदर जमा हो जाते हैं। वास्तव में हमारा पाचन तंत्र ऐसी चीजों को बाहर निकालने के लिए बना है। हालांकि, बहुत बड़े, कठोर या अधिक मात्रा में खाए गए बीज कुछ लोगों में पाचन संबंधी परेशानी पैदा कर सकते हैं, लेकिन उनका किडनी स्टोन से सीधा संबंध नहीं होता। अगर किसी व्यक्ति को पहले से किडनी स्टोन की समस्या रही है, तो उसे अपनी डाइट को लेकर थोड़ी सावधानी जरूर रखनी चाहिए। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ऑक्सालेट वाली चीजों का सेवन सीमित करना पड़ सकता है। साथ ही पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार लेना और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना फायदेमंद होता है।

इसलिए अगली बार जब कोई कहे कि बीज वाले फलों और सब्जियों को खाने से पथरी हो जाती है, तो याद रखें कि यह पूरी सच्चाई नहीं है। पथरी बनने के पीछे शरीर की अंदरूनी प्रक्रिया, पानी की मात्रा और खान-पान की कई आदतें जिम्मेदार होती हैं, सिर्फ बीज नहीं।

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