Wednesday, July 8, 2026
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NATO समिट में बोले डोनाल्ड ट्रंप, समझौते का दौर खत्म, 80 सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक का दावा

नाटो शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम समझौता खत्म हो चुका है। उन्होंने ईरान पर जवाबी हमलों की पुष्टि करते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी हमले का और कड़ा जवाब दिया जाएगा। अमेरिका ने 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक का दावा किया।

NATO Summit : तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान के साथ हुआ युद्धविराम (सीजफायर) समझौता अब समाप्त हो चुका है और अमेरिका अब तेहरान के साथ किसी नए समझौते का इच्छुक नहीं है। ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका ने पिछली रात ईरान में खतरनाक ठिकानों पर सटीक जवाबी हमला किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान भविष्य में कोई हमला करता है तो अमेरिका उससे भी अधिक कड़ा जवाब देगा। ट्रम्प ने दोहराया कि अमेरिका का प्रमुख उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना है। साथ ही उन्होंने नाटो पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि गठबंधन ने इस मुद्दे पर अमेरिका का अपेक्षित समर्थन नहीं किया।

इससे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया था कि उसने ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिका के अनुसार, यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई, जिसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया।

ईरान ने होर्मुज में 3 टैंकरों को निशाना बनाया

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन टैंकरों को निशाना बनाकर क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया। रिपोर्टों के अनुसार, प्रभावित जहाजों में एक टैंकर कतर का भी था। ईरान ने चेतावनी दी कि उसके द्वारा निर्धारित समुद्री मार्ग का पालन नहीं करने वाले जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसकी नहीं होगी। इस घटनाक्रम के बीच सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम भी जारी हैं, जिससे पश्चिम एशिया में सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं और गहरा गई हैं।

बता दें कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन पोतों पर हमले होने के बाद बुधवार तड़के ईरान पर ‘‘जवाबी हमले’’ किए और ईरान को वैश्विक बाजार में कच्चा तेल खुले तौर पर बेचने की अनुमति देने वाले लाइसेंस को भी रद्द कर दिया। ऐसा प्रतीत होता है कि ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद जबाव में बहरीन और कुवैत पर हमले किए।

इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन पोतों पर हमला किया था। अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह ‘‘हर जरूरी कदम उठाएगा।’’ इससे युद्ध रोकने के लिए हुए अंतरिम समझौते के टूटने का खतरा बढ़ गया है और पश्चिम एशिया के फिर से व्यापक संघर्ष की चपेट में आने की आशंका पैदा हो गई है।

ईरान ने दी कड़े जवाब की चेतावनी

ईरान पर हमले के बाद बहरीन और कुवैत ने बुधवार सुबह उन पर मिसाइल हमले होने के संबंध में अलर्ट जारी किए। बहरीन जहां अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का ठिकाना है, वहीं कुवैत में अमेरिकी थलसेना मौजूद है। पोतों पर हमले और उसके बाद ईरान पर अमेरिकी हमले ऐसे समय में हुए हैं, जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम जारी हैं। खामेनेई 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजराइल के हमलों में मारे गए थे। अंतिम संस्कार कार्यक्रम बृहस्पतिवार को समाप्त होंगे। ऐसा माना जा रहा था कि ईरान में शोक की इस अवधि में तनाव कम होगा लेकिन शोक मनाने वाले लोगों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ‘‘हत्या का आह्वान’’ कई बार किया है।

अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए बातचीत खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के बाद शुरू होनी है। इस वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह फिर से खोलने और ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने जैसे कठिन मुद्दों पर चर्चा होनी है लेकिन हालिया हमलों ने इस प्रक्रिया को खतरे में डाल दिया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने ‘एक्स’ पर लिखा, धौंस और उगाही का दौर खत्म हो चुका है। इससे कोई नतीजा नहीं निकलेगा। हम झुकते नहीं हैं।

होर्मुज हमले के बाद अमेरिकी जवाबी कार्रवाई

‘यूएस सेंट्रल कमान’ ने कहा कि अमेरिकी बलों ने ‘‘एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में बेकसूर चालक दल वाले वाणिज्यिक पोतों को निशाना बनाने और उन पर हमला करने की भारी कीमत वसूलने के लिए’’ ये हमले किए। उसने कहा कि उसने ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया जिनमें वायु रक्षा प्रणालियां, रडार और ईरान के अर्द्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली 60 से अधिक छोटी नौकाएं शामिल हैं। उसने कहा कि जलडमरूमध्य में पोतों को परेशान करने में इन नौकाओं की अहम भूमिका रही हैं। अमेरिकी सेना ने कहा कि वह समझौते का पालन नहीं होने की स्थिति में ईरान को जवाबदेह ठहराने के लिए ‘‘तैयार और मुस्तैद’’ है। उसने साथ ही कहा कि इस दौर के हमले समाप्त हो गए हैं।

ईरान ने उस पर हमले होने की बात स्वीकार की लेकिन यह नहीं बताया कि उसे कितना नुकसान हुआ। ईरान के सरकारी मीडिया ने बंदर अब्बास, केशम और सिरिक में धमाकों की आवाज सुनाई देने की खबर दी। ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान ने चेतावनी दी कि वह इस आक्रामकता और आतंकवादी कृत्य का निर्णायक जवाब देगी। उसने कहा, ईरानी सशस्त्र बल होर्मुज जलडमरूमध्य के मामलों में हस्तक्षेप की अनुमति किसी भी स्थिति में नहीं देंगे और न ही दूसरों को इसका प्रबंधन करने देंगे। पिछले महीने के अंत में भी पोतों पर ईरानी हमलों और अमेरिका के जवाबी हमलों की ऐसी ही घटनाएं हुई थीं। उसके बाद भी ईरान ने बहरीन और कुवैत पर हमले किए थे। बुधवार के हमले ऐसे समय में हुए, जब ट्रंप उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) सैन्य गठबंधन के शिखर सम्मेलन के लिए तुर्किये में थे।

अमेरिका ने ईरान का लाइसेंस रद्द किया

इस बीच, अमेरिका ने वह लाइसेंस भी रद्द कर दिया जिसके जरिए अंतरिम समझौते के तहत ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति दी गई थी। इस लाइसेंस से ईरान को कई वर्षों में पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर में खुले तौर पर तेल बेचने की अनुमति मिली थी। ईरान पर लंबे समय से संदेह रहा है कि वह प्रतिबंधित कच्चा तेल चीन को बाजार मूल्य से कम कीमत पर बेचता रहा है। लाइसेंस रद्द करने का फैसला जलडमरूमध्य में तीन पोत पर हमलों के बाद किया गया। ‘यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर’ ने कहा कि एक टैंकर ओमान के तट के पास से गुजर रहा था, तभी उस पर हमला हुआ और उसमें आग लग गई।

ईरान के सरकारी टेलीविजन ने कहा कि तरलीकृत प्राकृतिक गैस ले जा रहे टैंकर पर चेतावनियों की अनदेखी करने के बाद हमला किया गया लेकिन उसने इस हमले की सीधी जिम्मेदारी नहीं ली। ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी ने कहा कि दो अन्य पोतों को भी कुछ नुकसान पहुंचा लेकिन कोई घायल नहीं हुआ और दोनों पोत होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी यात्रा पर आगे बढ़ गए। युद्ध शुरू के बाद से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया है जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुए हैं।

ईरान और अमेरिका अंतरिम समझौते के तहत 60 दिन तक पोतों को बिना शुल्क दिए गुजरने की अनुमति देने पर सहमत हुए थे लेकिन तेहरान ने जोर दिया था कि पोतों के मार्गों पर उसका नियंत्रण होना चाहिए और बाद में मार्ग से गुजरने के लिए शुल्क वसूला जाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो इस जलमार्ग में दशकों से जारी व्यवस्था बदल जाएगी। अमेरिका और खाड़ी के कई अरब देशों का कहना है कि वे जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान द्वारा शुल्क वसूले जाने पर सहमत नहीं होंगे।

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Mukesh Kumar
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