जयपुर। चार महीने से शादी-ब्याह और अन्य मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त का इंतजार कर रहे परिवारों के लिए अच्छी खबर है। देवउठनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास समाप्त होगा और एक बार फिर शहनाइयां गूंजने लगेंगी। इस बार 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। देवउठनी एकादशी को अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है। यानी इस दिन विवाह के लिए अलग से शुभ लग्न और मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में जिन परिवारों में चार महीने से शादी की तैयारियां रुकी हुई थीं, वे अब विवाह समारोह की तैयारियों में जुटने लगे हैं।
देवउठनी एकादशी से शुरू होंगे मांगलिक कार्य
सनातन धर्म में देवउठनी एकादशी का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। चातुर्मास के दौरान विवाह सहित कई मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। इसके बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के साथ ही चातुर्मास समाप्त हो जाता है। इसी के साथ विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों का सिलसिला फिर से शुरू हो जाता है।
अबूझ मुहूर्त में बिना लग्न देखे कर सकते हैं विवाह
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवउठनी एकादशी अबूझ मुहूर्त है। इस दिन विवाह करने के लिए अलग से शुभ लग्न, नक्षत्र, चंद्रमा और ग्रहों की स्थिति देखने की आवश्यकता नहीं मानी जाती। मेष से लेकर मीन राशि तक सभी 12 राशियों के जातकों के लिए यह दिन शुभ माना गया है। यही वजह है कि जिन परिवारों को विवाह के लिए उपयुक्त मुहूर्त नहीं मिल पा रहा है, वे देवउठनी एकादशी के दिन विवाह संपन्न कराने का विकल्प चुन सकते हैं।
देवउठनी एकादशी पर होती है तुलसी विवाह की परंपरा
देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह का भी विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शालिग्राम और माता तुलसी का विवाह पूरे विधि-विधान के साथ कराया जाता है। घरों और मंदिरों में तुलसी के पौधे को सजाकर विवाह की रस्में निभाई जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार तुलसी विवाह को कन्यादान के समान पुण्यदायी माना गया है। कई परिवार इस दिन तुलसी विवाह के आयोजन के साथ ही अपने घरों में शादी-ब्याह की तैयारियां भी शुरू कर देते हैं।
14 दिसंबर से फिर लगेगा खरमास, विवाह पर लगेगी रोक
देवउठनी एकादशी के बाद विवाह के कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। इस बार 14 दिसंबर से खरमास शुरू होने की जानकारी दी गई है। खरमास के दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। ऐसे में 20 नवंबर से 13 दिसंबर के बीच विवाह के लिए उपलब्ध शुभ तिथियों को लेकर परिवारों में तैयारियां तेज हो सकती हैं। खरमास समाप्त होने के बाद पंचांग की गणना के अनुसार विवाह के शुभ मुहूर्त फिर शुरू होंगे।



