Rajasthan News: जयपुर। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि कानून के शासन (रूल ऑफ लॉ) का उद्देश्य हर विवाद का अदालत में फैसला कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को उसकी गरिमा का सम्मान करते हुए समयबद्ध, सुलभ और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है.
जयपुर में आयोजित ‘कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन एंड रूल्स ऑफ लॉ सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए CJI ने न्याय व्यवस्था में मध्यस्थता (मेडिएशन) को एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया. उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली का लक्ष्य ऐसे समाधान उपलब्ध कराना होना चाहिए जो प्रभावी होने के साथ-साथ मानवीय और सभी के लिए सुलभ हों. उन्होंने कहा, ‘कानून का शासन यह नहीं कहता कि हर शिकायत का अदालत में फैसला हो, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि हर नागरिक को गरिमा के साथ समय पर सुलभ न्याय पाने का अवसर मिले.’
मध्यस्थता से पक्षकार खुद तय करते हैं समाधान
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मध्यस्थता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विवाद से जुड़े पक्ष स्वयं अपने समाधान तैयार करते हैं. उन्होंने कहा, ‘केवल मध्यस्थता ही ऐसी व्यवस्था है जिसमें पक्षकार स्वयं अपने विवाद का समाधान तैयार करते हैं. इससे विवाद के वास्तविक कारणों का समाधान अपेक्षाकृत कम समय और कम लागत में संभव हो पाता है.’
उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से पक्षकार कठोर कानूनी दलीलों से आगे बढ़कर अधिक सार्थक और व्यावहारिक समाधान तक पहुंच सकते हैं, विशेषकर उन मामलों में जहां आपसी संबंधों को बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है.
प्राचीन परंपरा और आधुनिक जरूरत का संगम
प्रधान न्यायाधीश ने मध्यस्थता को भारत की प्राचीन विवाद समाधान परंपराओं से जोड़ते हुए कहा कि यह व्यवस्था आधुनिक समय की जरूरतों के अनुरूप भी है. उन्होंने विश्वास जताया कि बढ़ते मुकदमों और जटिल होते विवादों के बीच भविष्य में न्यायिक व्यवस्था में मध्यस्थता की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी.
उन्होंने कहा, ‘मध्यस्थता हमारी प्राचीन विरासत जितनी पुरानी है और सोमवार सुबह अदालतों में लगने वाले मामलों की सूची जितनी ही आज की आवश्यकता भी’ अपने संबोधन के अंत में सीजेआई सूर्यकांत ने सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं देते हुए न्याय व्यवस्था में वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया.
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