नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। रविवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई और हिरासत के बावजूद वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। नेताओं ने आंदोलन को देशभर में फैलाने की बात कही और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा।
CJP नेताओं के मुताबिक, उनकी लड़ाई अब केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक सीमित नहीं रही, बल्कि चुनावी प्रक्रिया और सरकार की कार्यशैली से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए हैं। पार्टी ने साफ किया कि जब तक उसकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, विरोध जारी रहेगा।
24 घंटे बाद रिहा हुए CJP के तीनों नेता
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास को दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया था। रविवार को तीनों को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जिसके बाद करीब 24 घंटे की हिरासत से रिहा कर दिया गया।
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह के अनुसार, रिहाई के साथ एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त रखी गई। तीनों नेताओं की रिहाई के बाद पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आगे की रणनीति बताई। अभिजीत दीपके प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद नहीं थे। उनकी दादी के निधन के बाद वह महाराष्ट्र में अपने परिवार के पास रवाना हो गए।
‘ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा’
CJP नेताओं ने कहा कि वे दोबारा जंतर-मंतर की ओर मार्च करेंगे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखेंगे। पार्टी ने समर्थकों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उनका कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब मिलना चाहिए। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है और इसे अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बता रही है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण अपात्र और दोहराव वाली प्रविष्टियों को हटाने के लिए किया जाता है।
आशुतोष रांका बोले, अब मोदी-शाह के खिलाफ भी लड़ाई
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशुतोष रांका ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान आंदोलनकारियों के साथ अनुचित व्यवहार किया गया और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में रखा गया।
रांका ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से शुरू हुआ आंदोलन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सरकार के खिलाफ भी हो गया है। उन्होंने सरकार पर चुनाव आयोग का बचाव करने का आरोप लगाया। रांका के ये बयान CJP का राजनीतिक रुख दर्शाते हैं। पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष अलग हो सकता है।
सौरव दास ने हिरासत और सुरक्षा इंतजामों पर उठाए सवाल
CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान नेताओं के फोन जब्त कर लिए गए और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर रखा गया। उन्होंने दिल्ली में भारी सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन पर लगी पाबंदियों का भी मुद्दा उठाया।
दास ने मौजूदा हालात की तुलना आपातकाल से करते हुए सरकार पर नागरिकों की असहमति को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी इस कार्रवाई के बावजूद अपना आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि दिल्ली में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। इन आरोपों पर पुलिस की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
दिल्ली की कार्रवाई के बाद आगे क्या करेगी CJP?
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई थी। पुलिस ने कई जगह प्रदर्शनकारियों को रोका और हिरासत में लिया। मेट्रो स्टेशन बंद रखने तथा रेल सेवाएं प्रभावित होने को लेकर भी सवाल उठे। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन और लोगों की आवाजाही सामान्य रखने के निर्देश दिए।
अब CJP ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। पार्टी का कहना है कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों पर पीछे नहीं हटेगी। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी अपनी अगली रणनीति किस रूप में लागू करती है और सरकार तथा चुनाव आयोग इन मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं।



