नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दावा किया है कि 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन के नेतृत्व का मनोबल काफी कमजोर हो गया था। प्रदर्शन स्थल से मंच हटाए जाने और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के चले जाने के बाद आयोजकों को लगा कि आंदोलन लगभग समाप्त हो गया है। इसी दौरान उन्होंने वांगचुक से प्रदर्शनकारियों को कुछ समय के लिए घर लौटने की अपील वाला संदेश तैयार करने में मदद मांगी थी।
वांगचुक के मुताबिक, पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन के आयोजक बेहद निराश थे। उन्हें आशंका थी कि प्रदर्शन दोबारा शुरू हो पाएगा या नहीं। उस समय प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर खाली करने और घर जाकर आराम करने की सलाह देने वाला संदेश तैयार करने पर चर्चा हुई थी। वांगचुक ने बताया कि उन्होंने संदेश तैयार भी किया, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया।
युवाओं की वापसी से लौटा उत्साह
वांगचुक ने बताया कि अगले दिन स्थिति में अचानक बदलाव आया। बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर पहुंचने लगे। पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के बावजूद युवाओं के वापस लौटने से आंदोलन के नेतृत्व में फिर से उत्साह पैदा हुआ।
उनके अनुसार, प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों की संख्या का आंदोलन के नेतृत्व के मनोबल पर सीधा असर पड़ रहा था। जब प्रदर्शनकारी वहां से चले गए तो नेतृत्व निराश हो गया, लेकिन अगले दिन युवाओं की वापसी ने आंदोलन को फिर से मजबूती दी। वांगचुक ने उन युवाओं को आंदोलन जारी रखने का श्रेय दिया, जिन्होंने कार्रवाई के बावजूद पीछे हटने से इनकार किया।
अनशन खत्म कराने के विकल्प पर भी हुई चर्चा
वांगचुक ने बताया कि सरकार के साथ बातचीत शुरू होने से पहले आंदोलन को समाप्त करने के विभिन्न विकल्पों पर भी विचार किया गया था। इनमें विपक्षी नेताओं की मदद से उनका अनशन समाप्त कराने का विचार शामिल था। शुरुआत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से संपर्क कर संसद में उनका अनशन खत्म कराने का अनुरोध करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली।
बाद में सरकार की ओर से खुफिया विभाग के अधिकारियों ने वांगचुक से संपर्क किया। 21 जुलाई की रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने अस्पताल में उनसे मुलाकात की और अनशन समाप्त करने का आग्रह किया।
वांगचुक ने बातचीत में जवाबदेही तय करने, मुआवजा देने और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दीर्घकालिक समाधान के लिए संसद में चर्चा की मांग रखी। बाद में आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों और कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा उनकी प्रमुख मांग बन गई।
आंदोलन जारी रखने का लिया फैसला
अनशन खत्म होने के बाद भी आंदोलन जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। वांगचुक ने आंदोलन को जारी रखने के फैसले को उचित बताया। उनके अनुसार, आंदोलन से कुछ हद तक जवाबदेही तय हुई और सरकार की ओर से प्रतिक्रिया भी सामने आई, लेकिन वह इसे किसी बड़े और व्यापक बदलाव के रूप में नहीं देखते हैं।



