Xi Jinping Trump Meeting : बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को चेतावनी देते हुए कहा कि ताइवान को लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ता मतभेद टकराव या यहां तक कि संघर्ष का कारण बन सकता है। चीन के सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी। आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ द्वारा प्रकाशित द्विपक्षीय वार्ता के विवरण के अनुसार, यहां बंद कमरे में दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में शी चिनफिंग ने ट्रंप से कहा कि अगर ताइवान का मामला अच्छी तरह से संभाला जाता है, तो अमेरिका-चीन संबंध ‘‘पूरी तरह स्थिर रहेंगे’’। शी ने कहा कि लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो दोनों देशों के सामने ‘‘टकराव और यहां तक कि संघर्ष’’ का खतरा है, जिससे पूरे संबंध गंभीर खतरे में पड़ जाएंगे। ट्रंप और चीन ने दो घंटे की बातचीत के बाद अपनी बैठक समाप्त की।

जिनपिंग ने दी ट्रंप को चेतावनी
शी जिनपिंग ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यदि ताइवान के मुद्दे को सही ढंग से संभाला गया तो चीन और अमेरिका के संबंध स्थिर रह सकते हैं, लेकिन लापरवाही की स्थिति में दोनों देशों के बीच टकराव और संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में केवल “शानदार” कहा और किसी विस्तृत टिप्पणी से बचते नजर आए। ताइवान मुद्दे पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया।
बताया गया कि ट्रंप के चीन दौरे से पहले बीजिंग स्थित अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बयान जारी कर अमेरिका को चेतावनी दी थी। इसमें चीन ने अमेरिका-चीन संबंधों की “चार लाल रेखाओं” का जिक्र किया, जिनमें ताइवान, मानवाधिकार, राजनीतिक व्यवस्था और विकास का अधिकार शामिल हैं। चीन ने साफ किया कि इन संवेदनशील मुद्दों पर किसी भी प्रकार का दबाव या हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

क्यों अहम है ताइवान का मुद्दा?
ताइवान का मुद्दा लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच सबसे संवेदनशील और विवादित विषय बना हुआ है। शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा मानता है और “एक चीन नीति” पर जोर देता है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका ताइवान को प्रत्यक्ष रूप से एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नहीं देता, लेकिन उसे सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक समर्थन लगातार देता रहा है। डोनाल्ड ट्रंप समेत कई अमेरिकी प्रशासन इस नीति को रणनीतिक संतुलन के तौर पर देखते आए हैं। यही कारण है कि ताइवान को लेकर दोनों महाशक्तियों के बीच टकराव की आशंका बनी रहती है। यह मुद्दा सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन और सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है, जिससे यह अमेरिका-चीन संबंधों का सबसे अहम तनाव बिंदु बन गया है।
2017 के बाद ट्रंप का पहला चीन दौरा
बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप का 2017 के बाद पहला चीनी दौरा है। इससे पहले दोनों नेता पिछले साल बुसान में आमने-सामने मिले थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात आने वाले समय में अमेरिका-चीन संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।



