Rajasthan News: जयपुर। भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग के सचिव मनोज जोशी ने राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) के माध्यम से रोगियों को सस्ती दर पर जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए अपनाई जा रही खरीद प्रणाली की सराहना की है. उन्होंने कहा है कि इसके माध्यम से रोगियों को गुणवत्ता युक्त दवाएं कम कीमत पर उपलब्ध हो रही हैं. इससे उन पर आर्थिक भार कम हुआ है.

दवाओं की खरीद, गुणवत्ता नियंत्रण एवं वितरण व्यवस्था पर चर्चा
जोशी ने शनिवार को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास एवं आरएमएससीएल के अधिकारियों के साथ बैठक में दवाओं की खरीद, गुणवत्ता नियंत्रण एवं वितरण व्यवस्था पर चर्चा की. बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को सस्ती, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है. जिला अस्पतालों से लेकर उप-स्वास्थ्य केंद्रों तक प्रत्येक स्तर पर आवश्यक दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि आमजन को समय पर उपचार मिल सके.
‘प्रतिदिन 19 हज़ार केंद्रों पर करीब 3.60 लाख लोगों को मिल रही दवाई’
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि आरएमएससीएल के माध्यम से दवा वितरण केंद्रों पर बाजार भाव की तुलना में कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और प्रतिदिन 19 हज़ार केंद्रों पर लगभग 3.60 लाख लोगों को दवाई उपलब्ध करवाई जाती हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रभावी प्रयासों का ही परिणाम है कि औषधि एवं टीका वितरण प्रबंधन प्रणाली (DVDMS) के केंद्रीय डैशबोर्ड पर मई माह के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है.

RMSCL प्रबंध निदेशक ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
RMSCL के प्रबंध निदेशक पुखराज सैन ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों की खरीद प्रक्रिया, भंडारण, बाजार दरों से तुलना तथा गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि औषधियों एवं चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जारी करने से पहले द्विस्तरीय गुणवत्ता परीक्षण (डबल-लेयर्ड क्वालिटी कंट्रोल) किया जाता है. औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का चयन कंप्यूटरीकृत रैंडम प्रणाली से किया जाता है तथा सभी जैविक (बायोलॉजिकल) उत्पादों के लिए एनआईबी (NIB) परीक्षण अनिवार्य है.
उन्होंने बताया कि पैनलबद्ध औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का नियमित निरीक्षण भी किया जाता है. गुणवत्ता की सतत निगरानी के लिए इन प्रयोगशालाओं द्वारा जांचे गए औषधि नमूनों में से 10 प्रतिशत नमूनों का रैंडम रूप से पुनः परीक्षण कराया जाता है, जिससे दवाओं की गुणवत्ता एवं निर्धारित मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित हो सके.
मीटिंग में कौन-कौन रहा मौजूद
बैठक में वित्त (व्यय) विभाग की शासन सचिव टीना सोनी, चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त बाबूलाल गोयल, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक डॉ. रविप्रकाश, चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा केंद्र सरकार के प्रतिनिधि मौजूद रहे.
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