Friday, July 24, 2026
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NEET विवाद पर बॉलीवुड का बड़ा रिएक्शन, करीना कपूर से कमल हासन तक, सितारों ने उठाई परीक्षा व्यवस्था पर आवाज!

NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रह गया है। धीरे-धीरे इस मुद्दे को फिल्म इंडस्ट्री का भी समर्थन मिलने लगा है। पहले सलमान खान, आलिया भट्ट, सोनाक्षी सिन्हा और अनन्या पांडे जैसे कलाकारों ने छात्रों के पक्ष में अपनी बात रखी थी। अब करीना कपूर खान, कमल हासन, वरुण धवन, इमरान खान और पीयूष मिश्रा भी खुलकर छात्रों के समर्थन में उतर आए हैं। किसी ने छात्रों की आवाज ना सुनने को सरकार की जिम्मेदारी बताया, तो किसी ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। वहीं कुछ कलाकारों ने आंदोलन को राजनीति से दूर रखने की भी अपील की।

मुंबई (प्रज्ञा पांडे)। पूरे देशभर में हो रहे छात्रों के द्वारा प्रदर्शन में पेपर लीक का मुद्दा उठाया जा रहा है। छात्रों के समर्थन में कई विपक्षी राजनेता ही नहीं अब सिल्वर स्क्रीन पर दिखने वाले स्टार्स भी खुलकर अपनी राय रख रहे है। हाल ही में करीना कपूर खान ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबा नोट साझा करते हुए कहा कि वह पिछले कुछ दिनों से इस मुद्दे पर चुप थीं, लेकिन अब और चुप नहीं रह सकतीं। उन्होंने लिखा कि जो युवा अपने भविष्य के लिए आवाज उठा रहे हैं, उनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। शिक्षा सिर्फ किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह बच्चों के भीतर भरोसा और उम्मीद पैदा करती है। लेकिन अगर छात्रों को यह महसूस होने लगे कि मेहनत, ईमानदारी और मेरिट की कोई कीमत नहीं रह गई है, तो उनका पूरे सिस्टम से विश्वास उठ जाएगा। करीना ने अपने पोस्ट में लिखा कि छात्रों को ऐसा सिस्टम मिलना चाहिए, जिस पर वे भरोसा कर सकें। उन्होंने कहा कि जब पूरी पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर एक साथ सवाल पूछ रही हो, तो उनकी बात सुनना किसी पर एहसान नहीं, बल्कि हर जिम्मेदार नागरिक और सरकार का फर्ज है। उन्होंने अपने संदेश का अंत इन शब्दों के साथ किया कि “हमारे बच्चे कल की तैयारी नहीं कर रहे हैं, बल्कि वही हमारा कल हैं।”

कमल हासन का शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल


अभिनेता और नेता कमल हासन ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की आलोचना करते हुए लिखा कि जब पहला बच्चा रोया था, तभी उसकी बात सुन ली जानी चाहिए थी, लेकिन सिस्टम तब जागा जब कई छात्रों की जिंदगी प्रभावित हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि जिस व्यवस्था में सीखने की जगह कोचिंग ने ले ली हो, जिज्ञासा की जगह तनाव ने और मेरिट की जगह अपराध ने, उस सिस्टम को स्वस्थ नहीं कहा जा सकता। कमल हासन ने यह भी कहा कि जब जवाब मांग रहे छात्रों को जवाब देने की बजाय लाठियां मिलती हैं, तो यह किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। अपने पोस्ट में उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से भी अनशन खत्म करने की अपील की और कहा कि अब देश की जिम्मेदारी है कि वह अपने बच्चों की बात सुने।

इमरान खान सड़क पर छात्रों के साथ नजर आए


रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेता इमरान खान मुंबई में आयोजित छात्रों के विरोध मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने छात्रों के साथ पैदल मार्च भी किया। इससे पहले उन्होंने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि जिन छात्रों ने पूरी ईमानदारी से मेहनत की, अगर वही सिस्टम से खुद को ठगा हुआ महसूस करें, तो यह बेहद दुखद स्थिति है। मुंबई प्रदर्शन के दौरान जब उनसे पूछा गया कि कई कलाकार ऐसे मुद्दों पर बोलने से क्यों बचते हैं, तो उन्होंने कहा कि एक कलाकार की पहचान सिर्फ उसकी फिल्मों से नहीं होती, बल्कि उसके विचारों से भी होती है। अगर कलाकार अपनी बात रखने से डरने लगे, तो कला का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

वरुण धवन बोले- छात्रों के सपनों का सम्मान होना चाहिए


वरुण धवन ने भी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने लिखा कि जब किसी छात्र का सपना टूटता है, तो सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदें प्रभावित होती हैं। उन्होंने कहा कि अगर सिस्टम में कोई कमी है, तो छात्रों को सवाल पूछने का पूरा अधिकार है। संबंधित अधिकारियों को उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और पारदर्शी समाधान निकालना चाहिए। हालांकि वरुण ने यह भी कहा कि इस पूरे आंदोलन को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए और इसका फोकस सिर्फ छात्रों और शिक्षा व्यवस्था पर ही रहना चाहिए।

पीयूष मिश्रा ने कहा- पहले सुन ली होती बात


अभिनेता, लेखक और गायक पीयूष मिश्रा ने भी छात्रों के समर्थन में वीडियो जारी किया। उन्होंने ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा लगाते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, वह दुखद था। उन्होंने कहा कि अगर सरकार और प्रशासन ने शुरुआत में ही छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लिया होता, तो हालात इतने खराब नहीं होते। उनके मुताबिक, संवाद हमेशा टकराव से बेहतर रास्ता होता है।

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