जयपुर/भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर जिले के वैर क्षेत्र में पूर्व भाजपा विधायक अतर सिंह भड़ाना की मौत के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। भौंडा गांव के पास क्रशर प्लांट और खनन से जुड़े विवाद के दौरान हुए हिंसक टकराव में गंभीर रूप से घायल भड़ाना की मौत हो गई। सोमवार को जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में उनके शव का पोस्टमार्टम पूरा हो गया। घटना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए, तो भाजपा के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने पलटवार करते हुए विपक्ष को पुराने घटनाक्रम याद दिलाए।
यह मामला ऐसे क्षेत्र का है, जहां क्रशर प्लांट और माइनिंग लीज तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर ग्रामीणों और संचालक पक्ष के बीच करीब दो साल से विवाद चल रहा था। इस दौरान कई बार विरोध प्रदर्शन और धरने भी हुए। रविवार, 11 अक्टूबर को यही विवाद हिंसक टकराव में बदल गया। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम, हमले में शामिल लोगों और पहले से चल रहे विवाद की परिस्थितियों की जांच कर रही है।
SMS अस्पताल में पोस्टमार्टम पूरा, हमले में गनमैन भी घायल
पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना रविवार शाम भरतपुर जिले के वैर थाना क्षेत्र के भौंडा गांव स्थित अपने क्रशर प्लांट पर पहुंचे थे। इसी दौरान वहां मौजूद ग्रामीणों और भड़ाना पक्ष के बीच विवाद बढ़ गया। आरोप है कि बड़ी संख्या में लोगों ने लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया। इस संघर्ष में भड़ाना और उनके सहयोगी गगन शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए।
दोनों को पहले वैर के अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर भड़ाना को जयपुर रेफर किया गया, जबकि गगन शर्मा को भरतपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया। भड़ाना की मौत के बाद उनका शव जयपुर के SMS अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखा गया, जहां सोमवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई।
घटना को लेकर गोली चलने के भी आरोप सामने आए थे। भड़ाना की पत्नी कमलेश ने दावा किया कि उनके पति पर हमला करने के दौरान गोली भी चलाई गई। हालांकि, वैर अस्पताल के चिकित्सकों ने शुरुआती जांच में गोली लगने की आशंका से इनकार किया था। गोली चलने और मौत की परिस्थितियों को लेकर पुलिस जांच कर रही है। पोस्टमार्टम से जुड़े निष्कर्ष सामने आने के बाद चोटों की प्रकृति को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
दो साल से चल रहा था विवाद, कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके थे ग्रामीण
अतर सिंह भड़ाना की मौत के पीछे क्रशर प्लांट और माइनिंग लीज तक पहुंचने वाले रास्ते का विवाद प्रमुख वजह के रूप में सामने आया है। पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भौंडा और रायपुर गांव के ग्रामीण लंबे समय से खनन गतिविधियों का विरोध कर रहे थे।
ग्रामीणों की आपत्ति थी कि क्रशर तक जाने के लिए ग्राम पंचायत की चरागाह भूमि का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने अतिक्रमण और कथित अवैध खनन के आरोप भी लगाए थे। इन मुद्दों को लेकर ग्रामीण कई बार धरना दे चुके थे और लीज तक जाने वाले रास्ते को रोकने की कोशिश भी की गई थी।
थाना प्रभारी धीरेंद्र सिंह के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, क्रशर को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले भी विवाद और मारपीट की घटनाएं हुई थीं। करीब दो साल से रुक-रुककर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। पिछले लगभग एक साल से क्रशर बंद था और इसे दोबारा शुरू करने की कोशिश की जा रही थी।
रविवार शाम प्लांट को फिर से शुरू करने की कोशिश के दौरान तनाव बढ़ गया। ग्रामीणों का दावा है कि वे पिछले 10 से 15 दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे और इसी दौरान भड़ाना पक्ष के लोगों के साथ उनका टकराव हुआ। दूसरी तरफ, भड़ाना के परिवार ने पुलिस और प्रशासन पर पहले से शिकायतें मिलने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस का बयान: दोनों पक्षों के आरोपों की जांच, भरतपुर रेंज IG से मांगी रिपोर्ट
पुलिस के मुताबिक, क्रशर प्लांट को लेकर ग्रामीणों और संचालक पक्ष के बीच विवाद लंबे समय से चल रहा था। भुसावर के सर्किल ऑफिसर नीरज भारद्वाज ने बताया कि टकराव के दौरान अतर सिंह भड़ाना और उनके सहयोगी गगन शर्मा पर लाठी-डंडों तथा पत्थरों से हमला किए जाने की जानकारी सामने आई है। दोनों को गंभीर चोटें आईं और अस्पताल पहुंचाया गया।
पुलिस ने यह भी बताया कि ग्रामीणों की ओर से चरागाह भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध खनन को लेकर आपत्तियां जताई गई थीं। वहीं, घटना के संबंध में दोनों पक्षों के आरोपों और टकराव की वास्तविक परिस्थितियों की जांच की जा रही है। ग्रामीणों के आरोपों को फिलहाल जांच का विषय माना जा रहा है, अंतिम निष्कर्ष नहीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने भरतपुर रेंज के IG से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। IG को घटनास्थल पर जाकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश भी दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।

अशोक गहलोत ने कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अतर सिंह भड़ाना की मौत के मामले को लेकर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। विपक्ष की ओर से इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा गया कि अगर पूर्व विधायक जैसे राजनीतिक व्यक्ति पर भीड़ हमला कर सकती है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता स्वाभाविक है।
कांग्रेस नेताओं ने घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि विवाद को लेकर पहले से शिकायतें और विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, तो प्रशासन को स्थिति बिगड़ने से पहले प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे।
पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश ने भी पुलिस और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि क्रशर प्लांट से जुड़ी समस्याओं और धमकियों के बारे में पहले भी जानकारी दी गई थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। ये आरोप परिवार की ओर से लगाए गए हैं और इन पर जांच के जरिए स्थिति स्पष्ट होनी बाकी है।
जोगेश्वर गर्ग का पलटवार: घटना दुर्भाग्यपूर्ण, लेकिन पुराने घटनाक्रम भी याद रखें
गहलोत के कानून-व्यवस्था संबंधी सवालों पर भाजपा के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने पलटवार किया। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इसे सीधे कानून-व्यवस्था की स्थिति से जोड़ने वालों को देश के इतिहास की दूसरी घटनाओं को भी याद करना चाहिए।
गर्ग ने कहा, “घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसको कानून-व्यवस्थाओं से जोड़ने वाले लोगों से मेरा सवाल है। देश के प्रधानमंत्री को उनके घर में गोली मार दी गई थी। तब कानून-व्यवस्था कैसी थी, उसको याद करके फिर आप लगाएंगे तो ज्यादा ठीक रहेगा।”
उनका इशारा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके आवास पर हुई हत्या की घटना की ओर था। गर्ग के बयान का तर्क यह था कि किसी एक गंभीर अपराध को आधार बनाकर मौजूदा सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने से पहले पुराने घटनाक्रमों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
इस तरह अतर सिंह भड़ाना की मौत का मामला अब अपराध और पुराने खनन विवाद के साथ-साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय भी बन गया है। एक ओर कांग्रेस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा ने विपक्ष की आलोचना पर आपत्ति जताई है।
यह खबर भी पढ़ें:-कौन थे पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना? भरतपुर में क्रशर विवाद के बाद भीड़ का हमला, इलाज के दौरान मौत
अब जांच पर टिकी नजर, पुराने विवाद की भी होगी पड़ताल
अतर सिंह भड़ाना की मौत के बाद सबसे अहम सवाल यही है कि लंबे समय से चल रहा क्रशर विवाद हिंसक संघर्ष तक कैसे पहुंचा और क्या समय रहते इसे रोका जा सकता था। ग्रामीणों की ओर से चरागाह भूमि और रास्ते को लेकर जताई जा रही आपत्तियों, भड़ाना परिवार की शिकायतों और घटना के समय दोनों पक्षों की भूमिका की जांच जरूरी होगी।
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और पुलिस मुख्यालय ने भरतपुर रेंज से रिपोर्ट मांगी है। जांच में हमले के दौरान गोली चलने के दावों, चोटों की प्रकृति और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान भी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल भड़ाना की मौत पर राजनीतिक बयानबाजी तेज है, लेकिन मामले की पूरी तस्वीर पुलिस जांच और मेडिकल रिपोर्ट से सामने आएगी। जिम्मेदारी तय करने के लिए जरूरी होगा कि सभी पक्षों के बयानों, उपलब्ध साक्ष्यों और पहले दर्ज शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाए।



