Delhi Tunnel Project : नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली में द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ने के लिए 6,969.67 करोड़ रुपये की लागत वाली छह-लेन की सुरंग परियोजना को बुधवार को मंजूरी दे दी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि एनएच-148एई के लिए 8.1 किलोमीटर लंबी इस सड़क सुरंग का निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) के तहत किया जाएगा और इसे पांच वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है।
द्वारका एक्सप्रेसवे से वसंत कुंज का सफर आसान होगा
आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के बीच तेज संपर्क उपलब्ध कराएगी तथा यूईआर-2/द्वारका एक्सप्रेसवे को दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज से जोड़ेगी। इससे गुरुग्राम, द्वारका, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डा और पश्चिम दिल्ली से दक्षिण दिल्ली की ओर आने-जाने वाला यातायात सुगम होगा। सुरंग का 1.98 किलोमीटर लंबा हिस्सा सदर्न रिज फॉरेस्ट के नीचे से होकर गुजरेगा। बयान में कहा गया कि भूमिगत सुरंग (ट्विन-ट्यूब) के निर्माण से सतह पर न्यूनतम व्यवधान होगा और रिज क्षेत्र का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
6,969 करोड़ की परियोजना से रोजगार भी बढ़ेगा
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) एम्स और महिपालपुर के बीच एक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का भी प्रस्ताव कर रहा है। यह कॉरिडोर सुरंग को बारापुला एलिवेटेड रोड से जोड़ेगा, जिससे पश्चिम और दक्षिण दिल्ली का संपर्क पूर्वी दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा से बेहतर होगा। टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) से बनने वाली यह सुरंग शिवमूर्ति इंटरचेंज से शुरू होकर नेल्सन मंडेला मार्ग और महिपालपुर-छतरपुर रोड के चौराहे से पहले समाप्त होगी। इस चौराहे पर यातायात का दबाव कम करने के लिए नेल्सन मंडेला मार्ग के साथ 1.8 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड सड़क बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, मौजूदा फ्लाईओवर के समानांतर छतरपुर से महिपालपुर की ओर एक अतिरिक्त फ्लाईओवर भी प्रस्तावित है।
छतरपुर की ओर दाहिने मुड़ने वाले वाहनों की सुविधा के लिए एक एलिवेटेड यू-टर्न बनाने का भी प्रस्ताव है। मुख्य मार्ग की लंबाई 6.3 किलोमीटर होगी। प्रस्तावित फ्लाईओवर और महिपालपुर-छतरपुर मार्ग पर एलिवेटेड यू-टर्न को शामिल करने पर परियोजना की कुल लंबाई 8.1 किलोमीटर होगी। बयान के अनुसार, अनुमान है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रत्येक लेन-किलोमीटर के निर्माण से औसतन 264 मानव-दिवस प्रतिदिन प्रत्यक्ष रोजगार और 55 मानव-दिवस प्रतिदिन अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होता है। इस आधार पर, इस परियोजना से लगभग 7.54 लाख मानव-दिवस का प्रत्यक्ष रोजगार और 9.80 लाख मानव-दिवस का अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होने का अनुमान है।



