नई दिल्ली। रणवीर सिंह की फिल्म ‘Dhurandhar’ को लेकर चल रही बहस के बीच प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल का बयान सामने आया है। फिल्म को कुछ लोगों की ओर से प्रोपेगेंडा कहे जाने के सवाल पर सान्याल ने कहा कि किसी भी फिल्मकार को अपनी कहानी और विचार दर्शकों तक पहुंचाने की आजादी होनी चाहिए। इसके बाद यह फैसला दर्शकों पर छोड़ देना चाहिए कि वे उस विचार से सहमत हैं या नहीं।
सान्याल ने बताया कि उन्होंने फिल्म के दोनों हिस्से देखे हैं और उन्हें पसंद भी आए। उन्होंने फिल्म की कहानी और कलाकारों के काम की सराहना की। उनका कहना था कि फिल्म देखने से पहले वह इसके कई कलाकारों के बारे में ज्यादा नहीं जानते थे, लेकिन फिल्म के जरिए उन्हें उनके अभिनय को देखने और समझने का मौका मिला।
फिल्म को प्रोपेगेंडा कहे जाने पर सान्याल ने किसी एक नजरिए को थोपने के बजाय अलग-अलग विचारों को जगह देने की बात कही। उनका मानना है कि सिनेमा में विभिन्न दृष्टिकोण सामने आने चाहिए। किसी कहानी को पसंद करना या उससे असहमत होना दर्शकों की अपनी पसंद होनी चाहिए।
‘Dhurandhar’ अपनी कहानी और राजनीतिक संदर्भों को लेकर रिलीज के बाद से ही चर्चा में है। फिल्म में जासूसी, आतंकवाद, राष्ट्रवाद और भारत-पाकिस्तान संबंधों जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। इन्हीं विषयों के कारण सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर इसे लेकर अलग-अलग राय देखने को मिली है। एक वर्ग इसे एक खास राजनीतिक नजरिए से प्रभावित फिल्म मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे मनोरंजन और कहानी कहने की स्वतंत्रता से जोड़कर देखता है।
सान्याल की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब फिल्म को लेकर बहस बॉक्स ऑफिस और मनोरंजन से आगे बढ़कर वैचारिक मुद्दे का रूप ले चुकी है। फिल्म के समर्थक इसकी कहानी और प्रस्तुति की तारीफ कर रहे हैं, जबकि आलोचक इसके राजनीतिक संदेश को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
सान्याल ने अपने बयान के जरिए मूल रूप से यही संदेश दिया कि फिल्मों और कला में अलग-अलग विचारों के लिए जगह होनी चाहिए। दर्शक किसी फिल्म को देखने के बाद खुद तय कर सकते हैं कि उसकी कहानी, विचार और संदेश से वह सहमत हैं या नहीं।



