Friday, July 3, 2026
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“Alpha” Movie Review: YRF Spy Universe की नई वूमन-लीड एक्शन फिल्म ने मचाया धमाल या हुई फेल?

YRF Spy Universe की पहली फीमेल-लीड फिल्म 'Alpha' का पढ़ें पूरा रिव्यू। जानें आलिया भट्ट, शरवरी, बॉबी देओल और अनिल कपूर की परफॉर्मेंस, कहानी, एक्शन, स्क्रीनप्ले और फिल्म का फाइनल वर्डिक्ट। क्या 'Alpha' थिएटर में देखने लायक है?

YRF Spy Universe की पहली फीमेल-लीड फिल्म ‘अल्फा’ बड़े बजट, हाई-ऑक्टेन एक्शन और इंटरनेशनल स्पाई थ्रिलर वाइब्स के साथ सिनेमाघरों में एंट्री लेती है। ट्रेलर देखकर जो एक्साइटमेंट बनी थी, फिल्म उसे पूरी तरह deliver नहीं कर पाती। डायरेक्टर शिव रवैल ने फिल्म को ग्लोबल स्पाई एजेंट स्टाइल देने की पूरी कोशिश की है और ये बात माननी पड़ेगी कि विजुअल्स, लोकेशंस और एक्शन सीक्वेंस काफी दमदार हैं। लेकिन कहानी और स्क्रीनप्ले की कमजोरी बार-बार फिल्म की रफ्तार तोड़ देती है।

STORY का गेम क्या है?

कहानी शुरू होती है 27 जुलाई 1999 से, जब इंडियन आर्मी के दो अफसर—विक्रांत कौल और फतेह सिंह लाखावत—एक “अल्फा फोर्स” बनाने का सपना देखते हैं। इस मिशन में आता है अल्फा सीरम, जो इंसान की ताकत, रिफ्लेक्स और हीलिंग को सुपरह्यूमन लेवल तक बढ़ा देता है। लेकिन ट्विस्ट यहीं से शुरू होता है….विक्रांत अपनी पत्नी को बचाने के लिए उसे सीरम दे देता है, फतेह इस फैसले को गद्दारी मानता है और एक बच्ची को अपनी असली पहचान से दूर कर देता है। सालों बाद वही बच्ची बनती है सीता (आलिया भट्ट) एक घातक हथियार, जिसे अपने ही सच का सामना करना पड़ता है। दूसरी तरफ दुर्गा (शरवरी) की एंट्री कहानी में और इमोशनल टकराव जोड़ती है।

आलिया भट्ट – फुल एक्शन मोड में, फाइट सीक्वेंस में दम दिखता है, लेकिन इमोशनल कनेक्ट थोड़ा कमजोर पड़ता है।
शरवरी – कम स्क्रीन टाइम, लेकिन इम्पैक्टफुल प्रेसेंस
बॉबी देओल – शो स्टीलर ग्रे शेड, खामोशी और खतरनाक स्क्रीन प्रेजेंस से पूरा गेम अपने नाम कर लेते हैं।
अनिल कपूर – अपने रोल में सॉलिड और भरोसेमंद
मूवी के एंड में आया ऋतिक रोशन का कैमियो – फैंस के लिए प्योर गुजबंप्स मूमेंट और आगे के यूनिवर्स की झलक

फिल्म का लुक एंड फील पूरी तरह हॉलीवुड स्टाइल स्पाई थ्रिलर वाला है। सिनेमैटोग्राफी और लोकेशंस शानदार हैं। एक्शन सीक्वेंस खासकर आलिया-शरवरी की फाइट काफी स्ट्रांग हाईलाइट है। लेकिन…कमजोर स्क्रीनप्ले, ढीली पेसिंग और कई जगह बिना लॉजिक आगे बढ़ती कहानी….इन सबने मिलकर फिल्म की पकड़ ढीली कर दी है। बैकग्राउंड स्कोर ठीक-ठाक है और एक्शन को सपोर्ट करता है, लेकिन कोई भी ऐसा गाना नहीं जो थिएटर से बाहर निकलने के बाद याद रहे।

फिल्म को फाइनल वर्डिक्ट

‘अल्फा’ एक विज़ुअली स्टन्निग स्पाई थ्रिलर है- स्टाइल, एक्शन और यूनिवर्स बिल्डिंग में मजबूत। लेकिन कहानी, इमोशन और स्क्रीनप्ले की कमजोरी इसे पूरी तरह उड़ान नहीं भरने देती। अगर आप YRF Spy Universe के फैन हैं और बड़े पर्दे पर एक्शन देखना पसंद करते हैं, तो एक बार देख सकते हैं। लेकिन अगर आप स्ट्रांग स्टोरी और इमोशनल डेप्थ ढूंढ रहे हैं, तो थोड़ी डिसअप्पोइंटमेंट हो सकती है।

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