तेहरान। ईरान में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े एक मामले में 25 वर्षीय अलीरेजा सेपाही को 5 अक्टूबर 2026 की सुबह फांसी दे दी गई। मौत से कुछ घंटे पहले उन्होंने जेल में बंद अपनी मंगेतर महशाद काशानी से फोन पर शादी की थी। दोनों अलग-अलग जेलों में बंद थे और आमने-सामने मिलने की अनुमति नहीं दी गई। वकील की मदद से फोन पर हुई यह शादी अलीरेजा की जिंदगी का आखिरी भावनात्मक पड़ाव साबित हुई। अगले दिन उन्हें इस्फहान की जेल में फांसी दे दी गई।
यह मामला जनवरी 2026 में ईरान में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जुड़ा है। अलीरेजा पर सुरक्षा बलों से जुड़े लोगों की मौत के मामले में गंभीर आरोप लगाए गए थे। ईरानी न्यायपालिका ने उन्हें दोषी ठहराए जाने की बात कही, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने मुकदमे की निष्पक्षता, बचाव पक्ष के सबूतों और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
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जेल में बंद मंगेतर से फोन पर हुई शादी
अलीरेजा सेपाही की मंगेतर महशाद काशानी भी प्रदर्शनों से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार थीं और जेल में पांच साल की सजा काट रही थीं। दोनों की शादी की तैयारी ऐसे समय हुई, जब अलीरेजा की फांसी की तारीख नजदीक आ चुकी थी। रिपोर्टों के मुताबिक, अलीरेजा की अपील खारिज होने के बाद उनके रिश्तेदारों को आखिरी मुलाकात के लिए बुलाया गया था। इसी दौरान उन्होंने अपनी मंगेतर से शादी करने की इच्छा जाहिर की। उनके वकील अमीरसालार दावूदी ने दोनों जेलों के बीच फोन पर संपर्क कराने की व्यवस्था की, ताकि वे विवाह की रस्म पूरी कर सकें। दोनों के परिवारों की सहमति से यह प्रक्रिया पूरी की गई।
मानवाधिकार संगठनों की ओर से साझा की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग के अनुसार, शादी में मेहर के तौर पर पवित्र कुरान की एक प्रति, रॉक कैंडी का एक टुकड़ा और एक लाल गुलाब देने की बात कही गई थी। हालांकि, जेल अधिकारियों ने दोनों को आखिरी बार आमने-सामने मिलने की अनुमति नहीं दी। इस तरह दोनों की शादी फोन पर हुई और कुछ ही घंटों बाद अलीरेजा को फांसी दे दी गई।
जनवरी के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा था मामला
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अलीरेजा सेपाही के खिलाफ मामला 8 जनवरी 2026 को इस्फहान के अलीखानी स्क्वायर में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा था। सरकारी न्यायिक समाचार एजेंसी मीजान के मुताबिक, इस घटना में चार पुलिस अधिकारियों की मौत हुई थी।
अलीरेजा और 21 वर्षीय अलीरेजा रायसी को हथियारबंद समूह से कथित संबंध, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने और अन्य गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया गया था। ईरानी न्यायपालिका के अनुसार, उनकी मौत की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। दोनों को 5 अक्टूबर की सुबह फांसी दी गई।
दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों ने मुकदमे की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। अमेरिका स्थित अब्दुर्रहमान बोरूमंद सेंटर ने दावा किया कि बचाव पक्ष के सबूतों पर उचित ध्यान नहीं दिया गया। संगठन के मुताबिक, उपलब्ध फुटेज से संकेत मिलता था कि कथित घटना के समय अलीरेजा घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। मानवाधिकार समूहों ने पूछताछ के दौरान यातना और दबाव में बयान लिए जाने के आरोप भी लगाए हैं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ईरानी अधिकारियों और मानवाधिकार संगठनों के विवरण में अंतर है, इसलिए मामले को समझते समय दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
पहले भी टल चुकी थी अलीरेजा की फांसी
अलीरेजा को 10 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, उनकी मां को भी गिरफ्तार किया गया था और वह पांच साल की सजा काट रही हैं।अलीरेजा को 28 जुलाई को सार्वजनिक रूप से फांसी दी जानी थी। मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की विशेष रिपोर्टर माई सातो के हवाले से आई खबरों के मुताबिक, निर्धारित समय से कुछ पहले उन्हें दिल का दौरा पड़ा और अस्पताल ले जाना पड़ा। इस वजह से उनकी फांसी टल गई, जबकि उसी मामले में दो अन्य लोगों को फांसी दे दी गई थी।
कुछ दिनों बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने पर अलीरेजा को फिर जेल भेज दिया गया। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इसके बाद वह लगातार फांसी के डर में जी रहे थे। अक्टूबर की शुरुआत में उनके परिवार को आखिरी मुलाकात के लिए बुलाया गया और इसके बाद उनकी शादी की व्यवस्था की गई।
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फांसी के बाद परिवार को नहीं मिला शव
अलीरेजा की मौत के बाद भी परिवार की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। ईरानवायर की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा अधिकारियों ने परिवार को शव उनके गृह क्षेत्र में दफनाने के लिए नहीं दिया। इसके बजाय अलीरेजा को इस्फहान से 200 किलोमीटर से अधिक दूर काशान में दफनाया गया।
मानवाधिकार संगठन का दावा है कि अधिकारियों ने परिवार पर अंतिम संस्कार और दफन की प्रक्रिया को लेकर दबाव बनाया। इस रिपोर्ट के अनुसार, अलीरेजा की मंगेतर महशाद काशानी को भी आखिरी मुलाकात की अनुमति नहीं दी गई थी।
मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल
ईरान में जनवरी के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में मौत की सजाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। ईरान ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, इन प्रदर्शनों से जुड़े कई मामलों में लोगों को मौत की सजा दी गई है। संगठन ने अलीरेजा और अलीरेजा रायसी के मुकदमों में उचित कानूनी प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई को लेकर सवाल उठाए हैं।
अलीरेजा सेपाही की कहानी गिरफ्तारी, विवादित मुकदमे, टली हुई फांसी और मौत से ठीक पहले फोन पर हुई शादी का घटनाक्रम सामने रखती है। एक ओर ईरानी अधिकारी उन्हें गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए जाने की बात कहते हैं, वहीं मानवाधिकार संगठन मुकदमे की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं। इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया और कैदियों के अधिकारों को लेकर बहस जारी है।



