नई दिल्ली। ADR की रिपोर्ट ने पांच राज्यों में उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड और राजनीतिक दलों की ओर से टिकट देने के कारणों को लेकर सवाल उठाए हैं।रिपोर्ट के अनुसार असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में कुल 3,539 उम्मीदवारों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। इनमें 1,405 उम्मीदवारों ने अपने चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामले घोषित किए। इनमें से 1,229 उम्मीदवारों के लिए संबंधित राजनीतिक दलों ने C-7 फॉर्म में टिकट देने का कारण बताया, जबकि 176 उम्मीदवारों के मामले में ऐसी जानकारी ADR को उपलब्ध नहीं हुई।
तमिलनाडु में सबसे ज्यादा C-7 जानकारी नहीं मिली
ADR के मुताबिक पांच राज्यों में तमिलनाडु में सबसे ज्यादा उम्मीदवारों के C-7 खुलासे उपलब्ध नहीं थे। तमिलनाडु में ADR ने 1,162 उम्मीदवारों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इनमें 473 उम्मीदवारों ने अपने हलफनामे में आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें 72 उम्मीदवारों के लिए C-7 में टिकट देने का कारण उपलब्ध नहीं मिला। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 55, केरल में 27, पुडुचेरी में 12 और असम में 10 उम्मीदवारों के मामले सामने आए, जिनके C-7 कारण ADR के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं थे।
पुडुचेरी में 35% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले
रिपोर्ट के मुताबिक पुडुचेरी में 112 उम्मीदवारों के रिकॉर्ड की जांच की गई। इनमें 39 उम्मीदवारों यानी करीब 35% ने आपराधिक मामले घोषित किए। इन 39 उम्मीदवारों में से केवल 12 के लिए राजनीतिक दलों की ओर से टिकट देने का कारण उपलब्ध था।
लोकप्रियता और अनुभव जैसे कारणों पर सवाल
ADR ने केवल C-7 फॉर्म की अनुपलब्धता पर सवाल नहीं उठाया है, बल्कि राजनीतिक दलों द्वारा दिए गए कारणों की प्रकृति पर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार कई उम्मीदवारों के लिए टिकट देने के कारण के तौर पर लोकप्रियता, सामाजिक कार्य, राजनीतिक अनुभव, योग्यता और अच्छी छवि जैसे समान कारणों का इस्तेमाल किया गया। कई मामलों में उम्मीदवारों के लिए इस्तेमाल की गई भाषा भी काफी मिलती-जुलती थी। इससे यह सवाल उठता है कि क्या प्रत्येक उम्मीदवार के आपराधिक रिकॉर्ड और व्यक्तिगत प्रोफाइल के आधार पर अलग-अलग कारण तैयार किए गए थे या औपचारिकता के तौर पर समान भाषा का इस्तेमाल किया गया।
तमिलनाडु में BJP, AIADMK, DMK और TVK पर भी सवाल
ADR ने तमिलनाडु के मामले में भाजपा, AIADMK, DMK और TVK के कुछ उम्मीदवारों के C-7 फॉर्म में समान शब्दों और कारणों के इस्तेमाल का उल्लेख किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया और टिकट देने के कारणों की वास्तविकता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
C-7 फॉर्म क्यों महत्वपूर्ण है?
चुनाव नियमों के तहत आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने वाली पार्टियों को उम्मीदवार के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी के साथ यह बताना होता है कि उसे टिकट क्यों दिया गया। ADR ने इन्हीं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध C-7 खुलासों और उम्मीदवारों के हलफनामों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है।
ADR ने रिपोर्ट की सीमा भी बताई
ADR ने रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया है कि उसका विश्लेषण चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। संभव है कि कुछ राजनीतिक दलों ने C-7 से जुड़ी जानकारी किसी अन्य माध्यम से जारी की हो, जो ADR के रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो सकी। इसलिए ADR ने जानकारी उपलब्ध नहीं होने वाले मामलों को सीधे नियमों का उल्लंघन नहीं माना है। इन्हें सार्वजनिक रिकॉर्ड में जानकारी उपलब्ध नहीं होने के तौर पर देखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आपराधिक मामले घोषित करने वाले उम्मीदवारों की संख्या और C-7 जानकारी की उपलब्धता चुनावी पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल जरूर उठाती है।



