रांची। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मंगलवार को रांची में विरोध मार्च निकाला। संगठन के कार्यकर्ताओं ने पुराने विधानसभा भवन से नए विधानसभा भवन तक मार्च करते हुए छात्रों की मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग दोहराई।
ABVP का यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है, जब पिछले कई दिनों से JPSC और JSSC के अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना, कथित गड़बड़ियों की केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराना और भर्ती प्रक्रिया में जरूरी सुधार करना शामिल है। इस मुद्दे को लेकर झारखंड की राजनीति भी गरमा गई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छात्रों की मुख्य मांग CBI जांच की है और सरकार को इस मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उनका आरोप है कि बल प्रयोग के जरिए छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से बीजेपी पर छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया गया है। JMM सांसद महुआ माजी ने कहा कि सरकार ने छात्रों की अधिकांश मांगों पर सहमति जताई है। उनके अनुसार, करीब 98 प्रतिशत मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया गया है, जबकि JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का विषय न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है। इससे पहले सोमवार को छात्रों के विधानसभा घेराव मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी थी।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। इसके बाद छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। लगातार जारी आंदोलन के बीच ABVP के मार्च ने मामले को और राजनीतिक रूप दे दिया है। छात्र संगठन अपनी मांगों पर ठोस निर्णय की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि कई मांगों पर कार्रवाई की जा चुकी है और कुछ मुद्दों पर कानूनी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना जरूरी है।
फिलहाल JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों और सरकार के बीच गतिरोध बना हुआ है। CBI जांच और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर सहमति नहीं बनने से आंदोलन आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।



