Wednesday, October 28, 2026
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ओम बिरला की मेजबानी में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का समापन

भारत की अध्यक्षता में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का संयुक्त घोषणा-पत्र के साथ समापन हुआ। ओम बिरला ने UNSC सुधार, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, जिम्मेदार AI और सतत विकास पर जोर दिया। वर्ष 2027 की अध्यक्षता चीन को सौंपी।

नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का दो दिवसीय सम्मेलन संयुक्त घोषणा-पत्र अंगीकृत किए जाने के साथ संपन्न हो गया। सम्मेलन में वैश्विक शासन व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की भागीदारी बढ़ाने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार, सीमापार आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जिम्मेदार इस्तेमाल और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों का स्थायी समाधान युद्ध और संघर्ष में नहीं, बल्कि संवाद, शांति और सहयोग में निहित है। सम्मेलन के समापन पर उन्होंने वर्ष 2027 के लिए ब्रिक्स संसदीय मंच की अध्यक्षता चीन को सौंप दी।

संयुक्त घोषणा-पत्र में UNSC सुधार और आतंकवाद पर जोर

ब्रिक्स संसदीय मंच के संयुक्त घोषणा-पत्र में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, देशों की संप्रभु समानता, परस्पर सम्मान और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। साथ ही अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने पर जोर दिया गया। घोषणा-पत्र में वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों का समर्थन किया गया। सीमापार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने की निंदा करते हुए आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई। ओम बिरला ने कहा कि अलग-अलग भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद मानवता के कल्याण, शांति और समृद्धि के प्रति साझा प्रतिबद्धता ब्रिक्स की सबसे बड़ी ताकत है।

युद्ध नहीं, संवाद और सहयोग से निकलेगा समाधान

समापन भाषण में ओम बिरला ने कहा कि दुनिया इस समय क्षेत्रीय संघर्षों, आर्थिक अनिश्चितता, व्यापारिक तनाव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का प्रभाव किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता, इसलिए संवाद, कूटनीति और आपसी सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने भारत के दृष्टिकोण को सामने रखते हुए कहा कि स्थायी समाधान युद्ध के बजाय संवाद, संघर्ष के बजाय शांति और प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग में तलाशे जाने चाहिए। उन्होंने ऐसी वैश्विक व्यवस्था की आवश्यकता बताई, जिसमें राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान हो और सभी देशों को विकास के समान अवसर मिलें।

AI और डिजिटल तकनीक से मजबूत होगी संसदीय कार्यप्रणाली

ओम बिरला ने कहा कि संसदें केवल कानून बनाने वाली संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि संवाद, आम सहमति, जवाबदेही और जनविश्वास के महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं। बदलते वैश्विक परिदृश्य में संसदीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी, सहभागी और जन-केंद्रित बनाना आवश्यक है। उन्होंने सदस्य देशों की संसदों से विधायी निरंतरता, लोकतांत्रिक निगरानी और जवाबदेही मजबूत करने का आह्वान किया। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल को संसदीय कार्यप्रणाली बेहतर बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। बिरला के अनुसार, AI के उपयोग से सांसदों की दक्षता बढ़ाने, संसदीय कार्यवाही को अधिक सुगम बनाने और नागरिकों की भागीदारी का विस्तार करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, तकनीक के इस्तेमाल में मानवीय मूल्यों, नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देना जरूरी है।

जलवायु परिवर्तन और सतत विकास को भी मिली प्राथमिकता

संयुक्त घोषणा-पत्र में विकास और जलवायु संबंधी एजेंडे को भी जगह दी गई। इसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) रिपोजिटरी के विस्तार, नैतिक AI प्रशासन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर समान लेकिन पृथक उत्तरदायित्वों एवं संबंधित क्षमताओं (CBDR-RC) के सिद्धांत का उल्लेख किया गया। ओम बिरला ने विकास और पर्यावरण को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए समावेशी एवं सतत विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की सफलता केवल सदस्य देशों की प्रगति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका लाभ व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, शिक्षा, सम्मानजनक रोजगार और समान अवसरों के माध्यम से युवाओं की प्रतिभा और तकनीकी ज्ञान को राष्ट्र निर्माण से जोड़ना संसदों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

भारत और यूरोपीय संघ के संसदीय संबंधों पर भी चर्चा

ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान ओम बिरला ने यूरोपीय संसद की विदेश मामलों की समिति (AFET) के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच संसदीय संवाद को नियमित बनाने तथा सांसदों, संसदीय समितियों और राजनीतिक समूहों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा हुई। बैठक में डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, व्यापार, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, सुरक्षा और रक्षा सहयोग जैसे विषयों पर अनुभव साझा करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। ओम बिरला ने बहुभाषी संसदीय कार्यप्रणाली में तकनीक की भूमिका का उल्लेख करते हुए संसद की ‘संसद भाषिणी’ पहल को रेखांकित किया। इसका उद्देश्य भाषा प्रौद्योगिकी के माध्यम से संसदीय कार्यवाही को अधिक सुलभ बनाना है, ताकि भाषा लोकतांत्रिक भागीदारी में बाधा न बने। बैठक में भारत-EU व्यापार एवं निवेश संबंधों, सेमीकंडक्टर, डिजिटल कौशल, 6G, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग पर भी विचार-विमर्श हुआ।

2027 में चीन संभालेगा ब्रिक्स संसदीय मंच की अध्यक्षता

दो दिवसीय सम्मेलन के समापन पर ओम बिरला ने वर्ष 2027 के लिए ब्रिक्स संसदीय मंच की अध्यक्षता चीन को सौंपते हुए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास जताया कि चीन के नेतृत्व में भी सदस्य देशों के बीच संसदीय सहयोग आगे बढ़ेगा। सम्मेलन का समापन सदस्य देशों की संसदों से शांति, सहयोग, साझा समृद्धि और अधिक न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभाने के आह्वान के साथ हुआ।

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